मेटास एड्वेंटिस्ट कॉलेज सह एसडीए हॉस्पिटल स्कूल ऑफ नर्सिंग बरियातू रोड, रांची में 28वां लैंप लाइटिंग और समर्पण/शपथ ग्रहण समारोह

 

टीम एबीएन, रांची। मेटास एड्वेंटिस्ट कॉलेज एवं एसडीए हॉस्पिटल स्कूल ऑफ नर्सिंग में आज दीप प्रज्वलन (लैंप लाइटिंग) और समर्पण/शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बेसिक बीएससी नर्सिंग के 60 और जीएनएम के 20 छात्र छात्राओं को फ्लोरेंस नाइटेंगल शपथ दिलायी गयी। मौके पर बड़ी संख्या में छात्रों के अलावा छात्रों के परिवार के सदस्य भी उपस्थित थे।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉक्टर सुधा देवी एम, (प्रिंसिपल, कॉलेज ऑफ नर्सिंग, रिम्स), कॉलेज के एक्सक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट कार्नेलियस मुर्मू, डॉ रीता अर्नेस्ट (मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, एसडीए हॉस्पिटल), एस डी डी नायडू (जेनरल वाइस प्रेसिडेंट), अजीत बाजराय रजिस्ट्रार), विजय राज (वाइस प्रेसिडेंट का हॉस्पिटल), कॉलेज प्रिंसिपल मर्लिन मोहन, स्कूल ऑफ नर्सिंग की प्रिंसिपल सुनीता हंसदा, इमानुएल लकड़ा (नर्सिंग सुप्रीटेंडेंट), पास्टर सुजल किस्कू के अलावा नमिता गुड़िया, सुनीता सुरीन, मरीन ग्लैडिन सुरीन रचेल, प्रेमशिला बाड़ा, सुशील दास कुजूर, हन्ना एलिजाबेथ, ओलिव कुजूर, कैरोलिन मरांडी, सोनाली कुजूर, ज्योति कच्छप, नमिता टोप्पो, नेवलिन डांग, संध्या लेनिन, कीर्ति कुंकल, वर्षा तिर्की, मेलिससा कुजूर व अन्य लेक्चरर्स उपस्थित थे।

बीएससी नर्सिंग के छात्रों का प्रस्तुतीकरण कॉलेज प्रिंसिपल मर्लिन मोहन और जीएनएम के छात्रों का प्रस्तुतीकरण सुनीता हंसदा ने किया। कार्यक्रम में अलफोंस थॉमस कुजूर ने फ्लोरेंस नाइटेंगल का किरदार निभाया और छात्रों की अगुवाई की, फ्लोरेंस नाइटेंगल शपथ सुनीता हंसदा ने छात्र-छात्राओं को दिलायी।

मुख्य अतिथि ने कहा कि सबसे पहले मैं इस शुभ अवसर के लिए मुझे मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के लिए प्रबंधन को धन्यवाद् देना चाहती हूं। दीप प्रज्जवलित  करना और शपथ ग्रहण औपचारिक रूप से छात्रों की इच्छा और नर्सिंग पेशे में प्रवेश की घोषणा का समारोह है। नर्सिंग केवल एक पेशा नहीं है बल्कि यह समाज की सेवा करने के लिए ईश्वर का निमंत्रण है और आप हमारे देश के लिए नर्सिंग पेशे का भविष्य है I

दीप प्रज्जवलित करना नर्सिंग छात्रों के ज्ञान, कौशल और भावना के हस्तांतरण का प्रतिक है, यह प्रकाश आपकी योग्यता, प्रतिबद्धता और करुणा को जागृत करता है I नर्सिंग में कुछ मूल बातें सिखने के बाद आप रोगियों को प्रतक्ष्य देखभाल प्रदान करने के लिए व्यावहारिक वातावरण में प्रवेश कर रहे हैं।

पहली बात, जब आप क्लिनिकल के लिए जा रहे है तो आपको रोगी की जरुरत को पूरा करने के लिए रोगी और उसके आस पास के वातावरण का अवलोकन करने के लिए सभी इन्द्रियों को तेज करना चाहिए।

दूसरी बात यह है की पेशेवर शिष्टाचार का पालन करना चाहिए जैसे की दूसरों की प्रति विनर्म और कोमल होना, रोगियों, बड़ों और अधिकारीयों का सम्मान करना न्याय , त्याग, जवाबदेही, निष्ठा और सत्यता जैसी नैतिकता का पालन करना।

अगली योग्यता जिसे आपको विकसित करना है वो है समीक्षात्मक सोच, यह व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक दोनों तरह के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है, समीक्षात्मक सोच की प्रक्रिया में किसी विशेष परिस्थिति में निर्णय लेने के पूर्व स्तिथि के विभिन्न तथ्यों और आंकड़ों का विषलेषण करना शामिल है।

अंत में कहना चाहूंगी की व्यवाहरिक पेशे में जाने और मरीजों के देखभाल की योजना बनाते समय आपको मरीजों की जरुरत और समस्याओं को प्राथमिकता देना सीखना चाहिए, इसलिए मैंने जो भी कुछ कहा है वो आपके पेशेवर जिंदगी के लिए अति आवश्यक है तो कृपया इन सभी बातों को अपने व्यवहार में शामिल करने का बेहतर प्रयास करेंI

आप सभी को आपके व्यक्तिगत और पेशेवर जिंदगी के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दी। धन्यवाद ज्ञापन कॉलेज के रजिस्ट्रार अजीत सोलोमन बजरॉय ने किया। उक्त जानकारी जनसंपर्क पदाधिकारी आलोक नारायण वर्मा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

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