एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। उद्योग विभाग स्टार्ट-अप टीम ने पटना के ज्ञान भवन में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया है, जिसका उद्घाटन विभाग के अपर मुख्य सचिव संदीप पौण्डरीक ने किया। उद्घाटन सत्र में बिहार के स्टार्ट-अप उद्यमियों को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव संदीप पौण्डरीक ने कहा कि बिहार में स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिए विभागीय स्तर पर अनेक प्रयास किये गये हैं।
हम स्टार्ट-अप इकाइयों की मदद इस तरह से करना चाहते हैं कि बिहार के स्टार्ट-अप अपनी ग्लोबल पहचान बनायें और यहां के स्टार्ट-अप उद्यमी न सिर्फ राज्य के अर्थव्यवस्था को मजबूत करें बल्कि पूरी दुनिया में छा जायें। उन्होंने कहा कि स्टार्ट-अप बिहार द्वारा आयोजित कार्यशाला में अनेक सफल स्टार्ट-अप उद्यमियों के साथ संवाद करने का मौका बिहार के उद्यमियों को मिलेगा।
दूसरे के अनुभवों से सीख कर हम सफलता की सीढ़ियां तेज गति से चढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवा सपनों को पंख लगाने तथा उन्हें उड़ान भरने के लिए खुला आसमान देने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने बिहार स्टार्ट-अप पॉलिसी 2022 बनायी है।
इस नीति के तहत लाभ पाने वाले उद्यमियों को-वर्किंग स्पेस उपलब्ध कराने के लिए पटना में दो स्थानों-मौर्यालोक और वित्त निगम भवन, फ्रेजर रोड में बी-हब बनाया गया है जिसमें मौर्यालोक स्थित बी-हब बन कर तैयार है।
बी-हब में सीटों के आवंटन हेतु बिहार स्टार्ट-अप के पोर्टल पर आनलाइन आवेदन किया जाता है और सीटों का आवंटन अधिकत्तम 02 वर्ष की अवधि के लिये किया जाता है। बी-हब में स्थायी सीटों का मासिक किराया 1500 रुपये, परिवर्तनशील सीटों के लिए मासिक किराया 1000 रुपये तथा दैनिक आधार पर 100 रुपये प्रतिदिन के आधार पर सीट आवंटित किये जाते हैं।
मौर्यालोक बी-हब में कुल 185 सीटों की व्यवस्था की गयी है। साथ ही एक कांफ्रेंस हॉल भी है जिससे लगभग 500 स्टार्ट-अप उद्यमियों को लाभ होगा। कार्यक्रम में उद्योग निदेशक पंकज दीक्षित ने कहा कि बिहार के युवाओं को स्टार्ट-अप नीति के बारे में जानकारी देने के लिए विभिन्न कॉलेजों/ शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया है।
ऐसे कार्यक्रम चंद्रगुप्त प्रबंध संस्थान, पटना, पटना कॉलेज, एएन कॉलेज, पटना पुस्तक मेला सहित सभी 38 जिलों के पॉलिटेकनिक/ तकनीकी संस्थानों में आयोजित किये गये हैं। सभी जिलों में स्टार्ट-अप इन्क्यूबेशन सेंटर खोले जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की स्टार्ट-अप पॉलिसी के तहत 10 वर्षों के लिए 10 लाख रुपये तक की ब्याज रहित सीड फंडिंग की व्यवस्था की गयी है।
महिलाओं द्वारा प्रारंभ स्टार्ट-अप को 5 प्रतिशत अधिक तथा अनुसूचित जाति/जनजाति तथा दिव्यांगों के स्टार्ट-अप को 15 प्रतिशत अधिक राशि सीड फंड के रूप में देने का प्रावधान इस नीति के तहत किया गया है। एक्सीलेरेशन प्रोग्राम में भागीदारी के लिए 3 लाख रुपये तक के अनुदान का प्रावधान स्टार्ट-अप नीति में है।
एंजेल निवेशकों से निवेश प्राप्त होने पर कुल निवेश का 2 प्रतिशत सफलता शुल्क और सेवी पंजीकृत कैटेगरी-1 तथा एंजेल समूह से प्राप्त फंड के बराबर अधिकतम 50 लाख रुपये तक के मैचिंग लोन की व्यवस्था बिहार स्टार्ट-अप फंड से की जाती है।
उद्योग विभाग के प्रयासों से बिहार में स्टार्ट-अप का माहौल बन चुका है। केन्द्र सरकार की स्टार्ट-अप इको सिस्टम रैंकिंग में एस्पायरिंग लीडर कैटेगरी-ए में बिहार को टॉप पोजिशन पर रखा गया है। यह विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के सतत प्रयास और सबके सहयोग से ही संभव हो पाया है।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में हस्तकरघा एवं रेशम निदेशालय के निदेशक विवेक रंजन मैत्रेय, निदेशक, तकनीकी विकास विशाल राज, विशेष सचिव दिलीप कुमार, चन्द्रगुप्त प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ राणा सिंह, केरल के डीसी मैट स्टार्ट-अप के डॉ जयशंकर प्रसाद, मेडिकैड इथोज प्राइवेट लिमिटेड केरल की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी विंग कमांडर रागश्री डी नायर, पीएसजी स्टेप, कोयंबटूर के कार्यकारी निदेशक डॉ के सुरेश कुमार, स्टार्ट-अप 360 बेंग्लुरू के को-फाउंडर अशोक जी एवं केरला राज्य इन्क्यूबेशन हेड के विशाल बी कदम आदि ने स्टार्ट-अप की विविध पहलुओं के संबंध में युवा उद्यमियों का मार्गदर्शन किया।
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