अमृत के समान है मां की जयन्ती, जानें कैसे...

 

कई असाध्य बीमारियों का समुचित इलाज भी है मां की जयन्ती

कहीं आप भी तो बर्बाद नहीं कर रहे मां की असली औषधि

पंडित रामदेव पाण्डेय 

एबीएन नॉलेज डेस्क। नवरात्र के ये  भी तीन चरण हैं : नवपत्रिका, जयश्री और विग्रह /मूर्ति/ सन्निधि, यह जौ जव/ जयन्ती (बार्ली) है इसकी आयुर्वेद में बड़ी महता है। इसे फेंकें नहीं, इसकी जड़ सहित बालु मिट्टी से दशमी को उखाड़ें और पानी में धो दें। फिर सुखा दें और ड्राई करें। फिर पाउडर बना लें और दो चम्मच सुबह शाम खायें। ये बार्ली पेड़ी पाउडर 2000 रुपये प्रति किलो बाजार में बिकता है। 

जयन्ती क्या है

जयन्ती जव का वह रुप है जो नौ दिनों का अंकुरित बीज और पौधा है। इसे नवरात्रि में बालु मिट्टी में कलश के नीचे रखा जाता है। इसे पहले दिन साफ कर धोकर बालु में मिलाते हैं। फिर इसे बालू में डालकर इसपर बालू में बीच में गड्ढा कर कलश रखा जाता है। विधान तो तांबा या पीतल रखने का है, पर मिट्टी कलश भी रखते हैं। 

रोज इसमें गंगा जल, पंचामृत, सर्वोषधि, महोषधि का जल डाला जाता है और इसमें दुर्गा देवी की पूजा की जाती है। इसी आदिशक्ति की जिसने ब्रह्मांड का निर्माण किया है। महाविष्फोट से इसके साथ ही नव दुर्गा शक्ति की आराधना, पंचदेव (जो प्रकृति के पांच तत्वों के प्रतीक हैं) इनकी अराधना की जाती है। 

दुर्गा सप्तशती के पाठ से उच्चरित ध्वनि, घंटा की ध्वनि इस जौ (बार्ली) के नव अंकुरित पौधों में प्रवाहित होती है। इसमें इतनी ऊर्जा होती है कि दशमी के दिन दाहिने कान पर रखने से ही यजमान का कल्याण करती है। तो इसके सेवन से अंदाज लगायें कितनी ऊर्जा शरीर में जायेगी।

इसमें कौन-कौन से विटामिन-खनिज हैं, जो आदिकाल से हमारे पूर्वज इस जयंती को हर घर में सालों भर संजोकर रखते थे और स्वास्थ्य संबंधी लाभ के लिए चूर्ण के रूप में पान करते थे। परंतु अज्ञानता में हम नदी में बहा रहे हैं और पर्यावरण को पीड़ित कर रहे हैं।

जयंती का स्वरस 20 मिली और सुखाकर पाउडर बनाकर एक चम्मच सुबह-शाम खाली पेट लेने से असाध्य रोगों में अत्यंत लाभकारी है। इसे ग्रीन ब्लड भी कह सकते हैं, जो एंटी आॅक्सीडेंट से भरपूर है। इसके सेवन से विटामिन बी1, विटामिन बी2, विटामिन बी5 प्रचुर मात्रा में मिलती है। इसके रस के सेवन से आयरन की कमी दूर होती है। साथ ही अनिद्रा, एसिडिटी, अपच, गैस, पेट फूलना, जोड़ों के दर्द, आम वात, गठिया, त्वचा के रोग, धातु रोग, स्त्री और पुरुष दोनों में लाभकारी होता है। बालों का झड़ना, मधुमेह, मोटापा, थायराइड, त्वचा की झुर्रियों में भी लाभदायक है और ये एंटी एजिंग है। मतलब बुढ़ापे को दूर करता है। आंखों की रोशनी अगर कम हो रही हो, तो इसका सेवन लगातार करने से अत्यंत लाभकारी साबित हो सकती है। इसके रस के कुल्ला करने से दांतों के पायरिया और मुंह के छालों में भी लाभकारी है। कुल मिलाकर ये जयंती अमृत तुल्य है। - डा. पीएन पाण्डेय, दक्ष आयुर्वेद, रांची।

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