ईश्वर भक्ति मानव जीवन का सर्वोत्तम कार्य है : स्वामी गंगाधर

 

टीम एबीएन, रांची। रांची जिला संतमत सत्संग समिति के तत्वावधान में महर्षि मेंही आश्रम, चुटिया में चल रहे पक्ष ध्यान साधना शिविर में आज आठवें दिन देव भूमि ऋषिकेश से आये हुए पूज्य स्वामी श्री गंगाधर जी महाराज ने सांयकालीन सत्संग में साधकों को कहा कि ईश्वर की असीम अनुकंपा से हमें मनुष्य शरीर प्राप्त हुआ है। 

जिस परमात्मा की कृपा से हमें यह शरीर मिला है, इस परमसत्ता का आभार व्यक्त करना हमारा पुनीत कर्त्तव्य है। ईश्वर की उपासना करना मानव जीवन का एक श्रेष्ठ कार्य है। उनकी उपासना करने के पूर्व हमें यह समझना होगा कि परमात्मा का स्वरूप क्या है उसकी पहचान कैसे करेंगे। 

विभिन्न धर्म के लोग उस परम सत्ता को विभिन्न नामों। से अभिव्यक्त करते हैं। यथा हिंदू उसे ईश्वर कहते हैं, मुस्लिम धर्मावलंबी इसे अल्लाह कहते हैं तो इसाई लोग गॉड कहते हैं। यूं तो इस असीम सत्ता को विभिन्न नामों से अभिहित करते हैं किंतु वह तत्व एक ही है। 

संत सदगुरु महर्षि मेंही परमहंस महाराज ने कहा है कि सबका ईश्वर है और उसको प्राप्त करने का रास्ता भी एक ही है। वस्तुत: ईश्वर इंद्रिय गंथ नहीं है। ईश्वर को अंतरसाधना से ही प्राप्त किया जा सकता है। 

संतमत को ईश्वर भक्ति की चार विधियां है- मानस जप, मानस ध्यान, दृष्टियोग एवं सूरत शब्द योग। इन क्रियाओं का अभ्यास करके साधक ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं और ईश्वर को तत्वत: जान कर जीवन के सभी दुखों से सदा के लिए छूट सकते हैं।

शाश्वत सुख को प्राप्त हो सकते हैं। समिति सभी धर्म प्रेमियों से निवेदन करता है कि सत्संग में भाग लेकर पुण्य के भागी बने और आत्म कल्याण का प्रबल प्रयास करे।

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