प्रकाश शब्द परमात्मा के विभूति स्वरूप है : गंगाधर जी महाराज

 

टीम एबीएन, रांची। रांची जिला सत्तमत सत्संग समिति के तत्वाधान में  चल रहे 15 दोनों के ध्यान साधना शिविर के सत्संग में ऋषिकेश के स्वामी पूज्य गंगाधर जी महाराज, प्रकाश और शब्द परमात्मा के विभूति स्वरूप है, साधक ज्ञान के द्वारा प्रकाश और शब्द दोनों को प्राप्त करते हैं।

वैदिक स्नातक धर्म में प्रकाश को ब्रह्म ज्योति इस्लाम धर्म में नूरे इलाही ईसाई धर्म में डिवाइन लाइट कहते हैं इस पद पर आगे बढ़ो, तो अंतर के सारे विकार मिट जाते हैं  महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज ने अपने वाणी में कहा है खोज करो अंतर उजियारी दृष्टि वन कोई देखा है।

महर्षि मेंही आश्रम चुटिया के मुख्य स्वामी श्री निर्मलानंद जी महाराज ने भी प्रवचन के क्रम में कहा कि परमात्मा के दो हाथ के रूप में प्रकाश व शब्द है साधना विशेष के द्वारा सड़क नो प्रकाश है, जो प्रभु की गोद में चले जाते हैं उनका जीवन पवित्र और सुख में बन जाता है।

रांची जिला संतमत सत्संग प्रेमियों से विनम्र निवेदन है कि इस ज्ञान गंगा में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर संत जनों के दर्शन कर एवं उनके प्रवचन को सुनकर आत्म कल्याण के मार्ग पर अग्रसर हो।

श्री फतेहचंद जी अग्रवाल के अथक प्रयास से और साथ ही सभी संतमत सत्संग समिति के सदस्यों के प्रयास से  जनकल्याण के हित के लिएयह कार्यक्रम रखा गया है।

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