टीम एबीएन, रांची। गोस्सनर कॉलेज के इतिहास विभाग की ओर से आर्कियोलॉजी इन झारखंड विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार का उद्देश्य विद्यार्थियों को झारखंड में पाये जाने वाले प्राचीन स्मारक और किलो के बारे में विस्तृत जानकारी देना था।
सेमिनार में आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया रांची सर्कल के सहायक पुरातत्वविध डॉक्टर मोहम्मद अजहर साबिर बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुए। उन्होंने झारखंड के प्राचीन स्मारक, मूर्तियां, कलाकृतियां एवं स्मारकों में बनायी गयी तकनीक पर प्रकाश डाला।
उन्होंने पावर प्रजेंटेशन के माध्यम से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को झारखंड में आर्कियोलॉजी विभाग की ओर से किये जा रहे कार्यों की अद्यतन जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण से विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास में बढ़ोतरी होती है।
डॉ मोहम्मद अजहर साबिर ने कहा कि झारखंड में ऐतिहासिक स्थलों की बहुलता है और इसे विश्व स्तरीय पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सिसई प्रखंड में अवस्थित नागवंशी राजा दुर्जनसाल के द्वारा निर्मित नवरत्न गढ़ में आर्कियोलॉजी विभाग के कार्यों की भी जानकारी दी।
इस अवसर पर आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया रांची सर्कल के इंजीनियर रमेश कुमार, हिमांशु शेखर और कन्हैया कुमार झा ने भी अपने अनुभव साझा किया। कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर इलानी पूर्ति ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों को बहुत कुछ सीखने का अवसर प्राप्त होता है।
सेमिनार की अध्यक्षता इतिहास विभाग की विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर अनिता अंजू खेस्स ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ बलबीर केरकेट्टा और धन्यवाद ज्ञापन डॉ नीलिमा सिन्हा ने किया।
सेमिनार में फिलासफी विभाग के डॉ पीके गुप्ता, मानव शास्त्र विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ एसके मुर्मू, राजनीति विज्ञान के विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर विनय जॉन, डॉ मीना तिर्की, डॉ हाराधन कोइरी, डॉ सीमा टेटे, डॉ योताम कुल्लू, डॉ सलमा केरकेट्टा, डॉ कोरनेलियुस मिंज सहित इतिहास विभाग, मानव शास्त्र विभाग और जूलॉजी विभाग के विद्यार्थी काफी संख्या में मौजूद थे।
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