श्रीकृष्ण की पूजा से सभी कामनाएं होती हैं पूर्ण : राखी अग्रवाल

 

  • श्रीकृष्ण को छप्पन भोग लगाने से कृपा बरसती है और पुण्य की होती है प्राप्ति: आरती गोयल 
  • लोहरदगा के कुंजलाल धर्मशाला और बीआइडी मुहल्ले में श्रीकृष्णा का छठी महोत्सव मनाया गया 

टीम एबीएन, लोहरदगा। लोहरदगा के देवालयों, घरों और सार्वजनिक स्थानों पर सोमवार को भगवान श्रीकृष्णा के जन्मोत्सव के छठे दिन उनका छठी महोत्सव मनाया गया। इस मौके पर भगवान के बाल रूप की विशेष पूजा अर्चना के उपरांत भव्य आरती की गयी। उन्हें 56 भोग लगाये गये। 

चारों ओर उत्साह का माहौल था। नन्हे-मुन्ने बच्चे भगवान श्रीकृष्णा और राधारानी के रूप में सज-धज कर कार्यक्रम में आए थे। कार्यक्रम का उत्साह बढ़ाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके द्वारा जो बाल लीलाएं की गयी। वह सबको मोहित कर रहा था। 

शहर के बरवाटोली चौक के निकट स्थित कुंज लाल धर्मशाला में अग्रवाल महिला समिति के तत्वावधान में छठी महोत्सव का आयोजन किया गया। वहीं बीआइडी मुहल्ले में मुहल्लावासियों ने छठी महोत्सव का आयोजन किया। यहां भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग लगाये गये। 

अग्रवाल महिला समिति की राखी अग्रवाल ने बताया कि सनातन धर्म में भगवान विष्णु के पूर्णावतार माने जाने वाले श्रीकृष्ण की पूजा बहुत ज्यादा शुभ और सभी कामनाओं को पूरा करने वाली मानी गयी है। यही कारण है कि हर साल भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को मुरलीमनोहर कृष्ण का जन्मोत्सव देश-दुनिया में धूम-धाम से मनाया जाता है। 

कान्हा के भक्त उनके जन्मोत्सव के ठीक छह दिन बाद सामान्य बालक की तरह उनकी छठी पूजा भी करते है।सनातन परंपरा में कान्हा की छठी पूजा का क्या महत्व है।  

बीआइडी के कार्यक्रम में आरती गोयल ने कहा कि कान्हा जी की छठी पूजा का महत्व सनातन परंपरा में जिस प्रकार एक छोटे बच्चे के जन्म लेने के छठवें दिन उसकी छठी मनाई जाती है, उसी प्रकार जन्माष्टमी के महापर्व से ठीक छह दिन भगवान श्रीकृष्ण के भक्त उनकी छठी बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मना रहे हैं। 

सनातन मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति भगवान श्रीकृष्ण की छठी पूजा को विधि-विधान से करता है। उन्हें उनकी पसंद के छप्पन भोग लगाता है। उस पर कान्हा की कृपा बरसती है। उसे पुण्यफल की प्राप्ति होती है। यही नहीं कान्हा की कृपा से श्रीकृष्ण अपने भक्तों की तमाम तरह की विपदाओं और कष्टों से दूर रखतें हैं।

जन्माष्टमी के छठे दिन लड्डू गोपाल की पूजा बिल्कुल वैसे ही की गयी, जैसे उनके घर में किसी नवजात शिशु की छठी मनाई जाती है। भगवान श्रीकृष्ण के बालस्वरूप की विधि-विधान से पूजा करने, भोग लगाने, जप करने और मंगलगीत गाये गये। आरती के बाद सबों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।

धर्मशाला के कार्यक्रम को सफल बनाने में अन्य लोगों के अलावा खुशबू अग्रवाल, प्रीति अग्रवाल, ममता बंका, प्रेम अग्रवाल, नीतू अग्रवाल, स्मिता अग्रवाल, वर्षा अग्रवाल समेत समिति की तमाम महिलाओं ने योगदान किया। वहीं बीआइड़ी के कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रीति मित्तल, आरती गोयल, तान्या अग्रवाल आदि ने सहयोग किया।

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