एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार चंद्रयान-3 की सफलता को लेकर आत्मविश्वास से भरी है और उसका लक्ष्य अगले वर्ष के उत्तरार्द्ध में भारत अंतरिक्ष में पहली बार मानव मिशन भेजना है जिसके पहले एक कृत्रिम मेधा रोबोट को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
अंतरिक्ष एवं परमाणु ऊर्जा विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ जितेन्द्र सिंह ने आज यहां संवाददाताओं से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के अंतरिक्ष क्षेत्र पर लगे गोपनीयता के पर्दों को उतार कर इसे सार्वजनिक क्षेत्र के लिए खोल दिया है जिससे इस क्षेत्र में नयी तकनीक और नयी प्रतिभाएं लाने का मार्ग खुल गया है।
सरकार चंद्रयान-3 की सफलता को लेकर आत्मविश्वास से भरी है और उसका लक्ष्य अगले वर्ष के उत्तरार्द्ध में भारत अंतरिक्ष में पहली बार मानव मिशन भेजना है जिसके पहले एक कृत्रिम मेधा रोबोट को अंतरिक्ष में भेजा जायेगा।
अंतरिक्ष एवं परमाणु ऊर्जा विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ जितेन्द्र सिंह ने आज यहां संवाददाताओं से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के अंतरिक्ष क्षेत्र पर लगे गोपनीयता के पर्दों को उतार कर इसे सार्वजनिक क्षेत्र के लिए खोल दिया है जिससे इस क्षेत्र में नयी तकनीक और नयी प्रतिभाएं लाने का मार्ग खुल गया है।
डॉ सिंह ने कहा कि इस समय तक 350 से अधिक स्टार्ट अप्स अंतरिक्ष क्षेत्र में काम कर रहे हैं और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को आधुनिक उपकरणों की आपूर्ति करने के प्रस्ताव दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष उद्योग के विकास में बहुत तेजी आयी है और आज हम विश्व की महाशक्तियों के बराबरी के स्तर पर पहुंच गये हैं।
चंद्रयान-3 के मिशन के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि चंद्रयान मिशन इस बार निश्चित रूप से कामयाब होगा और यह तय अवधि से अधिक काम करेगा। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण की योजना में समय अवश्य लगा है लेकिन इससे खर्च कम हुआ और प्रतिरोध कम होने से मिशन सुरक्षित रहा है। 23 अगस्त को यह तय समय पर चांद की सतह पर उतरेगा। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि उतरने की सटीक जगह का निर्णय उसी समय किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि इसरो का अगला मिशन गगनयान है। इसके लिए इस वर्ष के उत्तरार्द्ध में एक मानवरहित यान भेजा जाएगा। अगले वर्ष के पूर्वार्द्ध में कृत्रिम मेधा युक्त रोबोट वायुमित्र को भेजा जायेगा और इसकी सफलता एवं अध्ययन के बाद वर्ष 2024 के उत्तरार्द्ध में मानव मिशन भेजा जायेगा।
डॉ सिंह ने रूस के लूना-25 मिशन के क्रैश लैंडिंग और चंद्रयान मिशन को लेकर सावधानियों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि भारत के चंद्रयान मिशन में कक्षीय आरोहण विधि से भेजा गया है। इसलिए इसमें प्रतिरोध कम होने के कारण ऊर्जा की खपत कम हो रही है और चंद्रमा के बहुत नजदीक आने के बाद ही वर्टिकल लैंडिंग करेगा और इस बार उसकी बॉडी में सुरक्षा के सभी उपाय किये गये हैं जिससे इस मिशन की विफलता की संभावना ना के बराबर है।
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