13 करोड़ आदिवासी की एक होकर लड़ने की जरूरत : हेमन्त सोरेन

 

  • हमने जंगल और पहाड़ बचाया : सीएम

टीम एबीएन, रांची। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन बिरसा मुंडा संग्रहालय कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने संबोधित करते हुए कहा कि लंबे समय के बाद राज्य में आदिवासी महोत्सव का कार्यक्रम आयोजित हुआ है। पिछले वर्ष घनघोर बारिश के बीच हर्षोल्लास के साथ मनाया गया था, उसकी तुलना में आज का महोत्सव और भी भव्य और उत्साहवर्धक दिख रहा है। 

इस महोत्सव का अपना एक अलग मायना है, आज की परिस्थिति में ये दिवस और भी कई मायने में महत्वपूर्ण है। देश के विभिन्न राज्यों से और आदिवासी समुदाय के लोग अपने संस्कृति को प्रदर्शित तो करेंगे ही, कई समस्याओं पर चर्चा भी होगी। आदिवासी व्यंजन जो आज हमारी थाली से गायब हो रही, उसकी भी झलक यहां दिखेगी। 

देश के विभिन्न क्षेत्र में आदिवासी भाई प्रताड़ना झेल रहे हैं और अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। मणिपुर में जो घटना घटी वो सबके सामने हैं, तो कहीं आदिवासी भाई पर पेशाब किया जा रहा है। देश भर के 13 करोड़ आदिवासी समाज के लोगों को एक होकर लड़ने की आवश्यकता है, जबकि हम आपस में बंटे हुए हैं। हमारी लड़ाई एक होनी चाहिए।

13 करोड़ आदिवासी एक होकर लड़ने की आवश्यकता

विस्थापित होने वालों में 80% आदिवासी समुदाय के लोग हैं। यहां के किसान दूसरे के घरों में बर्तन मांजने, ईंट भट्टों में काम करने को मजबूर है। विकास की चपेट में किसको नुकसान हुआ, इसका कभी जायजा लिया गया। मुख्य धारा के इतिहासकारों ने भी आदिवासी समुदाय के साथ बेईमानी किया और इनके इतिहास को चिन्हित नहीं किया। हमारे पूर्वजों को जगह नहीं दी गयी, हमारी कई भाषाएं लुप्त होने के कगार पर हैं। आज आदिवासी समाज को चुप करने का प्रयास हो रहा है।

हमने जंगल और पहाड़ बचाया

आदिवासी इतिहास का जिक्र 1800 से पहले का नहीं दिखता, हमें टुकड़ों में बांट कर देखने का प्रयास किया गया। इस देश में सभ्यता, संस्कृति को गढ़ने में आदिवासी समाज की फिर से व्याख्या किया जाये। आदिवासियों के लिए अपनी जमीन, सभ्यता मायने रखती है। हमने जंगल और पहाड़ बचाया है। हमें जंगल में रहने वाले गरीब के तौर पर ना देखा जाये। जब लड़ाई अस्तित्व और वजूद की हो, तो सामने आना ही पड़ता है। देश के दूसरे हिस्से के आदिवासी का भी प्यार मुझे मिलता है। इसलिए जय हिंद के नारे के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लें।

इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन ने कहा कि झारखंड देश के गरीब राज्यों में से एक हैं और आदिवासी समाज हमेशा संघर्ष करता रहा है। शिक्षा से जीवन में बदलाव लाया जा सकता है।

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