एबीएन नॉलेज डेस्क। भारत का मिशन चंद्रयान-3 कामयाबी की नयी इबारत लिखने को तैयार है। चांद की दहलीज अब महज चंद कदम दूर है। पांच अगस्त को चंद्रयान-3 सफलतापूर्वक लूनर ऑर्बिट में दाखिल हो चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं, लैंडिंग से पहले चंद्रयान-3 से करीब इक्कीस सौ (2100) किलोग्राम वजन छू-मंतर हो जायेगा।
अब आप पूछेंगे कि ऐसा कैसा हो जायेगा? बता दें कि चंद्रयान का कुल वजन करीब 3 हजार 900 किलोग्राम है। वजन के मुताबिक हम इसे तीन हिस्सों में बांट लेते हैं; पहला प्रोपल्शन मॉड्यूल, दूसरा लैंडर और तीसरा रोवर।
इन तीनों हिस्सों में प्रोपल्शन मॉड्यूल का वजन सबसे ज्यादा है, यानी 2148 (इक्कीस सौ अड़तालीस) किलोग्राम। लैंडर मॉड्यूल का वजन 1752 किलोग्राम जबकि रोवर प्रज्ञान का वजन महज 26 किलोग्राम है।
लैंडिंग से पहले चंद्रयान का प्रोल्शन मॉड्यूल अलग हो जायेगा, यानि 2100 किलोग्राम वजन कम हो जायेगा। गौरतलब है कि 5 अगस्त को चंद्रयान-3 चांद की ऑर्बिट में दाखिल हो चुका है। इसरो ने बेहद रोचक अंदाज में चंद्रयान-3 के इस पड़ाव की जानकारी दी।
इसरो के ट्वीट के मुताबिक चंद्रयान-3 सफलतापूर्वक चांद की कक्षा में दाखिल हो चुका है। चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने के बाद उन्होंने ट्वीट करके अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि चंद्रयान-3 को अब चांद की ग्रेविटी महसूस होने लगी है।
स्पेस एजेंसी ने ट्वीट कर इस बात की पुष्टि की है। इसरो के मुताबिक, चंद्रयान-3 सही गति से आगे बढ़ रहा है और तय प्लान के मुताबिक इसका रोवर चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंड करेगा। लेकिन इससे पहले कई जटिल प्रक्रिया बाकी हैं।
सबसे पहले इसको ऑर्बिट बदलकर पेरील्यून तक पहुंचाना है। बता दें कि पेरील्यून का मतलब चांद की सबसे करीबी कक्षा से है। इसकी शुरुआत 6 अगस्त की रात 11 बजे से होनी है। इसरो का मिशन ऑपरेशन कॉम्प्लेक्स टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क चंद्रयान के हर मूवमेंट पर नजर बनाये हुए है।
यहीं से उसे कमांड भेजकर स्पीड को कंट्रोल किया जायेगा। कई जटिल प्रक्रियाओं के बाद 23 अगस्त 2023 को ये चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव इलाके में सॉफ्ट लैंडिंग करेगा।
इसरो के सूत्रों के हवाले से बताया है कि चंद्रयान 3 को चंद्रमा के करीब लाने के लिए अभी और चार मैनूवर, यानी प्रक्रिया करनी होगी, जिसके तहत चंद्रयान-3 को 6 अगस्त को पेरील्यून में इस्टैब्लिश किया जायेगा।
उसके बाद 17 अगस्त तक तीन और प्रक्रिया होंगी जिसके बाद लैंडिंग मॉड्यूल, जिसमें लैंडर और रोवर शामिल हैं, प्रपल्शन मॉड्यूल से अलग हो जायेगा। इसके बाद चंद्रमा पर अंतिम लैंडिंग से पहले लैंडर पर डी-ऑर्बिटिंग प्रक्रिया होगी।
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