एबीएन नॉलेज डेस्क। सूर्य की किरणें धीरे-धीरे मारक होती जा रही हैं। वैज्ञानिकों का कहना है धरती पर सूर्य की किरणों का हमला उसके आकलन से कहीं ज्यादा होने वाला है। हालात बता रहे हैं कि इस बार का सौर तूफान धरती के जीव-जंतु के लिए भी काफी खतरनाक हो सकता है। वैज्ञानिकों ने अंदेशा जताया है सूर्य का तापमान अपने शिखर पर पहुंच गया है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ये साल सूर्य अपना सबसे खतरनाक असर दिखा सकता है। साल 2023 के अंत तक सूर्य का प्रकोप बढ़ सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस खतरे का आकलन कुछ समय के बाद लगाया गया था, लेकिन यह समय से पहले ही दिख रहा है।
क्यों बदले हालात
जानकारी के मुताबिक सौरमंडल में हर 11 साल के बाद ऐसी स्थिति आती है। सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन आता है। उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव में बदल देता है। इस उलटफेर के चलते सूर्य की रोशनी तीक्ष्ण हो जाती है। रोशनी से अग्नि जैसी गर्मी निकलती है।
क्या होता है नुकसान
सौरमंडल के ये हालात पृथ्वी के लिए खतरनाक माने जाते हैं। सौर तूफानों से संचार माध्यम प्रभावित होने का खतरा रहता है। बिजली के बुनियादी ढांचे को भी नुकसान हो सकता है। इससे अंतरिक्ष यात्रियों पर बुरा प्रभाव होता है।
कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि अगला सौर तूफान जल्द आ सकता है। संभव है इसके बारे में जैसा अनुमान लगाया गया है, उससे अधिक शक्तिशाली हो सकता है।
समय से पहले खतरा क्यों
वैज्ञानिकों ने भविष्यवाणी की थी कि वर्तमान सौर चक्र 2025 में चरम पर होने वाला था लेकिन सनस्पॉट, सौर तूफान और दुर्लभ सौर घटनाओं को देखते हुए अनुमान को बदलना पड़ा है। ये खतरा इसी साल के अंत तक देखने को मिल सकता है।
वैसे वैज्ञानिकों के मुताबिक यह बिल्कुल स्पष्ट नहीं है कि सूर्य का चक्र इतने लंबे समय तक क्यों चलता है। यूके में यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के सौर भौतिक विज्ञानी एलेक्स जेम्स का कहना है कि यह सब सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र पर निर्भर करता है। जैसे ही सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र सक्रिय होता है उसके सुरक्षा घेरे पर असर होता है, जिससे प्रचंड रोशनी निकलती है। इसे सौर ज्वाला कहा जाता है।
कितना अलग है सौर 2025
अप्रैल 2019 में नासा ने सौर चक्र 25 के लिए अपना पूर्वानुमान जारी किया था और चेतावनी भी जारी की थी। इससे पहले 2014 के मध्य और 2016 की शुरुआत के बीच सौर चक्र चरम पर था, लेकिन आने वाले सौर चक्र के मुकाबले वह कमजोर था।
वैज्ञानिकों के मुताबिक दिसंबर 2022 में सूर्य 8 साल के सनस्पॉट शिखर पर पहुंच गया था और जनवरी 2023 में ही वैज्ञानिकों ने नासा की भविष्यवाणी के मुकाबले दोगुने से भी अधिक सनस्पॉट देखे। जिसके अगले महीनों में ही यह संख्या फिर बढ़ गयी। कुल मिलाकर लगातार 27 महीनों में देखे गये सौर धब्बों की संख्या अनुमानित संख्या से अधिक हो गयी।
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