राजधानी रांची में नागपुरी भाषा के मानकीकरण पर सेमिनार

 

टीम एबीएन, रांची। नागपुरी भाषा परिषद् एवं रामलखन सिंह यादव कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में कॉलेज परिसर में नागपुरी भाषा के मानकीकरण को लेकर सेमिनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि भारतीय विधिक माप विज्ञान संस्थान के पूर्व निदेशक अवध मणि पाठक ने कहा कि नागपुरी भाषा का एक मानक रूप होना चाहिए। नागपुरी भाषा का भी लिखित रूप एक होनी चाहिए।नागपुरी सदान और आदिवासी समुदाय को जोड़ने का काम करती है। रांची विश्विद्यालय रांची के डी एस डब्लू डॉसुदेश कुमार साहू ने कहा कि अपनी मातृभाषा से प्रेम करना चाहिए। उन्होंने नागपुरी भाषा के मानकीकरण के लिए हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया। राम लखन सिंह यादव कॉलेज के प्राचार्य डॉ जेपी सिंह ने कहा कि नागपुरी को मानक रूप देने के लिए भाषा की सरलता पर भी ध्यान देने की जरूरत है। वर्तनी सहज होनी चाहिए। विशिष्ट अतिथि रांची विश्विद्यालय के वित्त पदाधिकारी डॉ कुमार एएन शाहदेव ने कहा कि आज का दिन नागपुरी भाषा के मानकीकरण के इतिहास में स्वर्ण दिन सिद्ध होगा। उन्होंने इस कार्यक्रम को नागपुरी भाषा के लिए अतुलनीय, अविस्मरणीय एवं अकल्पनीय बताया। डॉ शाहदेव ने कहा कि मांय माटी और मांय भाषा को कभी नहीं भूलना चाहिए। मानकीकरण के लिए इस तरह के प्रयास सराहनीय हैं। भाषा को बचाने के लिए त्यागी और तपस्वी बनना पड़ता है। पद्मश्री मधु मंसुरी हंसमुख ने कहा कि नागपुरी भाषा का मानकीकरण होना ही चाहिए। पद्मश्री मुकुंद नायक ने कहा कि पठन पाठन और लेखन कार्य के लिए नागपुरी का मानक रूप जरूरी है। नागपुरी भाषा परिषद् की महासचिव डॉ शकुंतला मिश्र ने कहा कि किसी भी भाषा का मानकीकरण एक लंबी प्रक्रिया है। अतः इसे एक कमेटी बनाकर निरंतर रूप से मानक रूप देने के लिए कार्य किये जायेंगे। नागपुरी साहित्यकार धनेंद्र प्रवाही ने कहा कि नागपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए मानक रूप देना होगा।नागपुरी मानकीकरण की आवश्यकता आज की मांग है।अनेक रूपों में एक रूप खोजने की जरूरत है। नागपुरी गायक क्षितीश कुमार राय ने कहा कि मानकीकरण के लिए अपना क्षेत्रीय मोह त्यागना होगा। इसके लिए समाज के अंतिम व्यक्ति को लेकर भी चलने की जरूरत है। रांची विश्विद्यालय रांची के नागपुरी विभागाध्यक्ष डॉ उमेशनंद तिवारी ने कहा कि नागपुरी मानकीकरण के लिए भाषा की मूल ध्वनि पर भी ध्यान देने की जरूरत है। सर्वमान्य नागपुरी को ही मानक रूप देने की भी आवश्यकता है। डॉ सविता केशरी ने कहा कि जान बूझ कर नागपुरी को बिगाड़ना उसकी सुंदरता को समाप्त करने जैसा है। शब्दों के प्रयोग पर अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए। जेएन कॉलेज धुर्वा के नागपुरी विभाग के अध्यक्ष डॉ हरीश चौरसिया ने कहा कि नागपुरी के कई रूप हैं लेकिन मानकीकरण के लिए किसी एक रूप को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र विशेष के कारण नागपुरी के कई रूप हो गये हैं लेकिन पठन-पाठन के लिए एकरूपता बनाने की जरूरत है। राम लखन सिंह यादव कॉलेज के नागपुरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ खालिक अहमद ने कहा की मानकीकरण के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है। सेमिनार में नागपुरी रेडियो नाटक संग्रह सहनई पुस्तका का लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक आकाशवाणी रांची में प्रसारित 10 नागपुरी रेडियो नाटकों का संग्रह है। 112 पेज की इस पुस्तक का प्रकाशन झारखंड झरोखा ने किया है। इस पुस्तक का संकलन एवं संपादन डॉ शकुंतला मिश्र का है। पुस्तक की कीमत 200 रुपये है। कार्यक्रम का संचालन डॉ शकुंतला मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन डॉ राम कुमार ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत आरएलएसवाई के छात्र छात्राओं के स्वागत गीत से हुई। मौके पर डॉ बुटन महली, डॉ कोरनेलियुस मिंज, डॉ रामजय नाइक, डॉ अशोक बड़ाईक, डॉ अंजू कुमारी, डॉ अंजू लता, इंद्रजीत राम, युगेश महतो, विकास सिन्हा, संतोष भगत, करमी मांझी, रेखा कुमारी, सरोज कुमारी, डॉ अहिल्या कुमारी, सुषमा मिंज, रामदेव बड़ाईक, मनीष कुमार पाण्डेय, नवीन नगेसिया, सोनू सपरवार, पप्पू कुमार महतो, पूजा, फागुनी बेरिया आदि मौजूद थे।

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