पटरियों पर भूत के डांस से डर के साये में लोग

 

  • रांची के भुतहा रेलवे स्टेशन पर भूत ट्रेन से लगाता है रेस...

एबीएन सोशल डेस्क। कहते हैं कि भूत-वूत कुछ नहीं होते हैं, लेकिन झारखंड के रांची में एक भुतहा रेलवे स्टेशन है जहां भूत रहता है और लोगों ने भूत को देखा भी है, जिसके चलते डर के मारे स्टेशन पर लोग नहीं जाते। वहीं, इस स्टेशन को अब रेलवे ने बंद कर दिया है।

इस स्टेशन पर भूत ट्रेन से रेस लगाता है रेस
मामला जिले से 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बेगुनकुदर स्टेशन का है। यह स्टेशन भुतहा स्टेशन है। यहांं भूत ट्रेन से रेस लगाता है। भूत के डर से अब कोई भी लोको पायलट ट्रेन को इस स्टेशन पर नहीं रोकता हैं। लोग भी डर के मारे यहां नहीं जाते, जिसको देखते हुए अब रेलवे ने इस स्टेशन को बंद कर दिया है।

 बताया जाता है कि यहां पर भूतों का खौफ इस कदर है कि शाम के 5 बजते ही स्टेशन वीराने में डूब जाता है। वहीं, बेगुनकुदर स्टेशन साल 1960 में खुला था, लेकिन कुछ सालों बाद यहां भूत होने की अफवाह फैल गयी थी। ग्रामीणों के मुताबिक 1967 में एक रेलकर्मी को उस महिला को भूत दिखा, जिसका कुछ दिन पहले स्टेशन पर ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। इसके बाद कुछ दिन बाद ही यहां के स्टेशन मास्टर और उनके परिजनों की लाशें उनके रेलवे क्वार्टर से मिली।

भूत के डर से इस रेलवे स्टेशन को कर दिया गया बंद
इसके बाद से कई लोगों ने यहां भूत देखने के दावे किये। सभी जगहों पर यहां पर भूत होने की बात फैल गई। स्टेशन पर काम करने वाले रेलकर्मी भी यहां से भाग निकले और रेल कर्मचारियों ने इस स्टेशन पर अपनी पोस्टिंग कराने से इंकार कर दिया। लोको पायलट ने भी यहां ट्रेन रोकना बंद कर दिया क्योंकि लोको पायलट का कहना था कि भूत ट्रेन से रेस लगाती है व ट्रेन के आगे पटरी के ऊपर जाकर नाचने लगती है और कभी-कभी तो ट्रेन से भी तेज दौड़ कर आगे निकल जाती है। इसके बाद रेलवे ने इस रेलवे स्टेशन को बंद कर दिया, लेकिन आज भी ट्रेन का इस रूट से होकर गुजरना जारी है। हालांकि ट्रेन यहां रुकती नहीं है।

2009 में एक बार फिर से इसे खोला गया था, लेकिन स्थिति वही थी

रांची रेल मंडल के सीनियर डीसीएम निशांत कुमार ने इस बात को स्वीकारा कि यह एक भूत बाधित स्टेशन है और रेलवे ने उसे बंद कर दिया है। उन्होंने बताया कि प्रेतात्मा ट्रेन के आगे पटरियों पर देखी जाती है और भूत के खौफ के कारण वहां पायलट ट्रेन नहीं रोकना चाहता था, जिस कारण रेलवे को यह कदम उठानी पड़ा। हालांकि 2009 में एक बार फिर से इसे खोला गया था, लेकिन स्थिति वही थी।

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