एबीएन सोशल डेस्क। गौ आधारित कृषि व पंचगव्य उत्पाद के प्रशिक्षक राधेश्याम सोनी ने बताया कि देशी गाय का घी से मानसिक तनाव सहित तमाम बीमारियों से छुटकारा मिल जाता है। जो लोग सोते समय नाक में घी का उपयोग करते हैं, उन्हें माइग्रेन होने का खतरा कम हो जाता है।
उत्तर प्रदेश के उरई, झांसी जैसे जनपदों में अपने गौ सेवा व पंचगव्य उत्पाद के लिए पहचाने जाने वाले राधेश्याम सोनी ने बताया कि देशी गाय के घी को नाक में डालना चाहिए। इससे एलर्जी कम होती है, लकवा का उपचार हो जाता है, कान का पर्दा बिना आपरेशन ठीक हो जाता है, दिमाग तरोताजा रहता है, चेतना वापस आ जाती है, बालों का झड़ना कम हो जाता है और कोमा में गया मरीज भी राहत महसूस करता हैं।
राधेश्याम सोनी ने बताया कि नशा के शिकार हुए व्यक्ति को देशी घी और मिश्री को मिलाकर खिलाइये, शराब भांग या गांजे का नशा बहुत हद तक कम हो जायेगा। जो लोग देशी गाय के घी का प्रतिदिन सेवन करते हैं, उन्हें गैस या कब्ज जैसी समस्या नहीं होती है। गाय का घी बल व वीर्य बढ़ाता है।
हथेली या पांव के तलवे पर जलन होने पर घी से मालिश करें, तुरंत आराम मिल जायेगा। गाय के घी से माइग्रेन नामक बीमारी समाप्त होती है। नाक के रास्ते उपयोग करने से माइग्रेन न के बराबर रह जायेगा।
उन्होंने हार्ट अटैक व कैंसर के उपाय को लेकर बताया कि हार्ट अटैक की समस्या आजकल आम बात हो गयी है, ऐसे में गाय के घी का सेवन करने वालों का हार्ट बेहद मजबूत रहता हैं।
गाय का घी कैंसर जैसी बीमारी को पैदा होने और फैलने से रोकता है। देशी गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता है। घी के लगातार सेवन से स्तन व आंत के खतरनाक कैंसर से भी बचा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि वजन बढ़ने की समस्या में भी गाय का घी बेहद कारगर उपाय है। गाय के घी से केस्ट्राल नहीं बढ़ता है तो इससे मोटापा स्थिर हो जाता है। और धीरे धीरे घी के सेवन से मोटापा कम होता चला जाता है। इसके साथ ही घी के सेवन से वजन पर कोई खासा असर नहीं होता।
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