ट्रेन के आखिरी डिब्बे के पीछे क्यों बनाया रहता है क्रॉस का निशान?

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय रेलवे का नेटवर्क काफी बड़ा है। रोजाना लाखों की संख्या में लोग एक जगह से दूसरी जगह की यात्रा करते हैं। रेलवे यात्रियों की सुविधाएं के लिए नई-नई तरह की ट्रेनों की भी शुरुआत करता रहता है। कुछ साल पहले शुरू की गयी वंदे भारत एक्सप्रेस के जरिये रेलवे ने लोगों को बड़ी सौगात दी है। 

अब तक दस रूट्स पर चलायी जा चुकी वंदे भारत ट्रेनों को आगे भी कई अन्य रूट्स पर शुरू करने का ऐलान किया जा चुका है। ट्रेनों से जुड़ी चीजों के बारे में जानने के लिए यात्री काफी उत्सुक रहते हैं। रेलवे भी ट्रेनों को लेकर तरह-तरह जानकारियां लोगों को देता रहता है, ताकि उन्हें भारतीय रेलवे के बारे में और अधिक इंफोर्मेशन मिल सके। 

इसी तरह रेलवे ने हाल ही में बताया है कि ट्रेनों के कोच के पीछे जो क्रॉस का सिंबल बनाया जाता है, उसका क्या मतलब होता है? आमतौर पर यह साइन आखिरी कोच के पीछे पीले रंग से बनाया जाता है, ताकि दूर से दिख सके। रेलवे ने बताया है कि यह सिंबल बताता है कि यह ट्रेन का आखिरी कोच है। 

इसके जरिए रेलवे अधिकारी कन्फर्म करते हैं कि ट्रेन के सभी कोच रवाना हो गये हैं और कोई भी कोच बचा नहीं है। इसके अलावा ट्रेन के आखिरी डिब्बे पर क्रॉस चिह्न के होने का एक और महत्व है। ट्रेन के आखिरी डिब्बे पर क्रॉस का निशान किसी दुर्घटना को बचाने के मिशन के साथ हाइलाइट किया जाता है, क्योंकि यह इस बात की पुष्टि करने में मदद करता है कि साइन वाला उस ट्रेन का आखिरी डिब्बा है। 

साथ ही, दूर से यह दिखाई भी आसानी से दे जाता है। इसके अलावा, इससे यह भी पता चलता है कि यह ट्रेन किसी भी हादसे का शिकार नहीं हुई है। आखिरी में  सिंबल देखकर रेलवे कर्मचारी आसानी से पता लगा सकते हैं कि ट्रेन का सफर पूरी तरह से सुरक्षित रहा और कोई भी दुर्घटना नहीं हुई। वहीं, अगर ट्रेन से  सिंबल वाला कोच गायब होता है तो फिर स्टेशन मास्टर अलर्ट हो जाता है और यह जानकारी आगे देता है।

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