टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले से सदन के बाहर विपक्ष के तेवर देख कर इस बात का अनुमान लग गया था कि आज भी सदन में शोर शराबा गूंजेगा। जिस मुद्दे पर सदन में चर्चा होनी चाहिए, उन मुद्दों पर सिर्फ शोर शराबा के जरिए सदन का वक्त जाया हो रहा है और नुकसान राज्य की जनता को उठाना पड़ रहा है।
बुधवार को ही विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा के विधायकों के द्वारा स्लोगन लिखे भगवा रंग के टी शर्ट पहन कर आने पर आपत्ति जतायी थी और नियमन दिया था। इसके बावजूद गुरुवार को भी सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले भाजपा के विधायक कल वाली ही टी-शर्ट पहन कर विधानसभा पहुंचे और नतीजन विधानसभा का प्रश्नकाल हंगामे की भेंट ही चढ़ा।
सदन बाधित होता रहा, स्थगित होता रहा। अध्यक्ष के मना करने के बाद भी विपक्ष के विधायक टी शर्ट उतारने को तैयार नहीं हुए।
सदन में जमकर तू तू मैं मैं हुआ। खूब शोर शराबा मचा। जिस सदन में जनता के हित की बात गुंजनी चाहिए, वहां सिर्फ आरोप प्रत्यारोप शोर शराबा सुनाई देता रहा। लिहाजा विधानसभा स्थगित होता रहा। सदन के संचालन में राज्य की जनता के हर दिन करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, पर उसका लाभ राज्य को नहीं मिल पा रहा है।
झारखंड विधानसभा में संसदीय कार्यमंत्री ने सदन में कहा कि कार्य मंत्रणा की बैठक में तय हुआ कि सभी विपक्ष के विधायक स्लोगन लिखा हुआ टी शर्ट उतार देंगे। विधानसभा अध्यक्ष भी बीजेपी के विधायकों से इसे उतारने का आग्रह करते रहे। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि कल भी व्यवधान हुआ था, जो भी सदस्य आज चर्चा में भाग लें। भगवा कलर का स्लोगन लिखा टी शर्ट उतार कर चर्चा में भाग लें। ताकि सदन की मर्यादा बनी रहे।
कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि आज जो बहस होगा, अगर इस ड्रेस में होगा तो कार्य मंत्रणा के निर्णय का कोई मतलब नहीं रहा। जबकि सदन में विपक्ष की तरफ से भाजपा विधायकों ने टी शर्ट उतारने से मना कर दिया।
भाजपा विधायक सी पी सिंह ने कहा कि कल से हम लोग पहन कर नहीं आयेंगे। भाजपा विधायक भानू प्रताप ने कहा कि कल सत्ता पक्ष के तरफ से व्यवधान पैदा किया गया था। आप का सम्मान है और आपने आग्रह किया है तो कल से विपक्ष इस परिधान को पहन कर नहीं आयेंगे।
झारखंड विधानसभा की अगर हम बात करें तो सदन का ज्यादातर समय शोर शराबे और हंगामे की भेंट चढ़ रहा है। इसका लाभ राज्य की जनता को मिले। इसके लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को अपनी भूमिका निभाना होगा। विपक्ष जिस तरह से अपनी जिद पर आमादा है, उससे इतर सदन में बहस में भाग लेकर सरकार को न सिर्फ घेर सकती है, बल्कि सरकार को विपक्ष के द्वारा सदन में उठाये गये सवाल का सदन में सरकार को जबाव देने के लिए मजबूर कर सकती है।
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