वैज्ञानिक बोले- क्लाइमेट चेंज ही नहीं खेल कुछ और...
एबीएन नॉलेज डेस्क। क्लाइमेट चेंज ग्लेशियर के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो रहा है। लद्दाख में दो ग्लेशियर डुरुंग-द्रुंग और पेनसिलुंगपा ऐसे हैं, जिसके बारे में वैज्ञानिकों ने बताया कि 1971 से 2019 के बीच अपनी जगह से 7.8 किलोमीटर और 1.5 किलोमीटर तक खिसक गये हैं। वैज्ञानिकों ने इसके लिए क्लाइमेट चेंज और कुछ अन्य फैक्टर्स को जिम्मेदार माना है, जिसकी वजह से ग्लेशियर पिघल रहे हैं।
वैज्ञानिक इस बात से भी हैरान हैं कि सिर्फ एक किलोमीटर का एरियल डिस्टेंस होने के बावजूद ग्लेशियर अलग-अलग गति के साथ खिसक रहे हैं। इसको लेकर हाल ही में सस्टेनेबिलिटी नाम की एक मैगजीन में वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (डब्ल्यूआईएचजी) के वैज्ञानिकों मनीष मेथा, विनीत कुमार, पंकज कुंमार और कलाचंद सेन द्वारा तैयार रिपोर्ट पब्लिश की गयी थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लेशियर लद्दाख में 14,612 फीट की ऊंचाई पर पेन्सी-ला पास में स्थित हैं। डीडीजी ग्लेशियर 72 स्क्वायर किलोमीटर में फैला है, इस ग्लेशियर का 7.8 स्क्वायर किलोमीटर का हिस्सा विलुप्त हो चुका है, और जंस्कर नदी में जा मिला है। वहीं एक अन्य ग्लेशियर पीजी 16 स्क्वायर किलोमीटर में फैला एक छोटा ग्लेशियर है, जिसका 1.5 स्क्वायर किलोमीटर का हिस्सा पिघल चुका है, जो कुल क्षेत्र में 8% है।
रिसर्च से पता चला है कि 1971 से 2019 के बीच डीडीजी प्रति वर्ष 13 मीटर और पीजी 5.6 मीटर पिघल गया है। रिसर्च के प्रमुख लेखक मनीष मेथा कहते हैं कि ग्लेशियर का पीछे हटना न सिर्फ क्लाइमेट चेंज से प्रभावित है, बल्कि ग्लेशियर की टोपोग्राफिक सेटिंग्स और मोरफोलॉजी से प्रभावित है. एक ही ज्योलिजकल क्षेत्र में दोनों ग्लेशियर एक ही क्लाइमेट परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, फिर भी अलग-अलग गति के साथ पीछे हटना, इस इशारा करता है कि यहां खेल कुछ और है।
रिसर्च के प्रमुख लेखक मनीष मेथा कहते हैं कि ग्लेशियर का पीछे हटना न सिर्फ क्लाइमेट चेंज से प्रभावित है, बल्कि ग्लेशियर की टोपोग्राफिक सेटिंग्स और मोरफोलॉजी से प्रभावित है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि एक ही ज्योलिजकल क्षेत्र में दोनों ग्लेशियर एक ही क्लाइमेट परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, फिर भी अलग-अलग गति के साथ पीछे हटना, इस इशारा करता है कि यहां खेल कुछ और है। वो ग्लेशियर जिनपर रिसर्च किये गये हैं वे आकार, ऊंचाई, ढलान, डब्रिस कवर और यहां स्थित सुप्रा और प्रोग्लेशियल से प्रभावित हो रहे हैं। वैज्ञानिक बताते हैं कि जांस्कर नदी में दो ग्लेशियरों की अहम भूमिका है, जहां डीडीजी जांस्कर की सबसे करीब स्थित नदी डोडा और पीजी सुरु नदी का ऑरिजिन है।
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