टीम एबीएन, दुमका/ रांची। गांधी मैदान में झारखंड मुक्ति मोर्चा का 44वां स्थापना दिवस समारोह गुरुवार देर रात धूमधाम से संपन्न हुआ। इस समारोह में 1932 की खतियान पर आधारित स्थानीयता विधेयक जिसे राज्यपाल रमेश बैस ने वापस लौटाया, उस पर नेताओं ने केंद्र पर जमकर बरसे। सभा को संबोधित करने वाले पार्टी के सभी नेताओं ने इस मुद्दे पर अपनी भड़ास निकाली। आइये जानते हैं क्या कहा मंत्री हफीजुल हसन, विधायक बसंत सोरेन, सीता सोरेन, नलिन सोरेन और राजमहल सांसद विजय हांसदा ने...
1932 को पाने के लिए लड़ाई के लिए तैयार रहें : झारखंड सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन ने मंच से अपने संबोधन में यह नारा दिया कि जो 1932 की बात करेगा वही झारखंड पर राज करेगा और 1932 की जो बात करेगा उसे ही गांव में प्रवेश करने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक लड़ाई शिबू सोरेन ने अलग राज्य के लिए लड़ी थी। अब दूसरी लड़ाई हेमंत सोरेन 1932 के खतियान पर आधारित स्थानीयता के लिए लड़ रहे हैं। आप तैयार रहें और संकल्प लें कि इस लड़ाई में हेमंत सोरेन का साथ देना है।
दुमका जिला के जामा विधानसभा की विधायक और शिबू सोरेन की पुत्रवधू सीता सोरेन ने भी 1932 का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि आज हेमंत सोरेन जब अच्छा काम कर रहे हैं तो केंद्र सरकार को जलन हो रहा है। उन्होंने कहा कि 1932 वाला विधेयक को राज्यपाल ने वापस कर दिया है लेकिन हम लोग चुप नहीं बैठने वाले हम लोग फिर से विधानसभा में इसे पारित कराकर उसे राज्यपाल के पास भेजेंगे।
दुमका के गांधी मैदान से झामुमो ने अपनी मंशा साफ कर दी है कि वो 1932 खतियान के लिए आर-पार की लड़ाई के लिए भी तैयार है। 1932 के आधार पर स्थानीयता नीति को लागू करने को लेकर झामुमो अड़ा हुआ है। उन्होंने अपनी मंशा साफ कर दी है कि इसे हर हाल में धरातल पर उतारा जाएगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि झामुमो के इस दृढ़ संकल्प से राज्य की राजनीति किस ओर जाती है।
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