एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन के कोरोना से निपटने के रवैये से डब्ल्यूएचओ समेत दुनिया के कई देश चिंतित दिख रहे हैं। चीन जिस तरह से कोरोना के आंकड़े छिपा रहा है उससे पड़ोसी देश तो सतर्क हो ही गये हैं उससे भी अधिक सतर्क अमेरिका दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने बयान जारी कर ड्रैगन को नसीहत तक दे डाली है।
बाइडन ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि हां मैं चीन के कोरोना से निपटने के इस रवैये से चिंतित हूं। चीन मामले की गंभीरता को समझ नहीं रहा है। इसलिए भारत, अमेरिका समेत कई देशों ने चीन से आने वाले यात्रियों के लिए जांच अनिवार्य कर दिया है। यानी जो भी यात्री चीन से आयेंगे उन्हें 72 घंटे भीतर के निगेटिव रिपार्ट के साथ-साथ आरटीपीसीआर टेस्ट से भी गुजरना होगा।
राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि चीन फिलहाल कोरोना महामारी के लिहाज से बेहद संवेदनशील देश है। चीन को पारदर्शिता बरतनी चाहिए। चीन अपने फायदे के लिए महामारी को नजरअंदाज कर रहा है। बाइडन ने कहा कि चीन को टेस्टिंग बढ़ानी चाहिए ताकि सही आंकड़े सामने आ सके। चीन इसे नियंत्रण में करे और विवेकपूर्ण कदम उठाये ताकि हम किसी भी संभावित वेरिएंट के प्रसार को रोकने के लिए वह सब कुछ करें जो हम कर सकते हैं।
बाइडेन प्रशासन ने बुधवार को कहा कि अमेरिका और पाकिस्तान का यह सुनिश्चित करने में साझा मत है कि तालिबान आतंकवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करे और उन्हें अपने क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं करने दें। आतंकवाद एक अभिशाप बना हुआ है जिसने इतने सारे पाकिस्तानी, अफगान और अन्य निर्दोष लोगों की जान ले ली है। संयुक्त राज्य अमेरिका और पाकिस्तान का वास्तव में यह सुनिश्चित करने में साझा हित है कि तालिबान प्रतिबद्धताओं पर खरा उतरे और आईएसआईएस-के जैसे आतंकवादी समूह विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने अपने दैनिक समाचार सम्मेलन में संवाददाताओं से कहा कि अल-कायदा की तरह टीटीपी अब क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने में सक्षम नहीं है।
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