एबीएन सेंट्रल डेस्क। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की बारात प्रयागराज से मीरजापुर बैलगाड़ी से झूमते हुए आयी थी। प्रयागराज से बारात को सात दिन आने और सात दिन जाने में लगे थे। 1878 में नगर के बसनही बाजार स्थित इमली महादेव मोहल्ला उस पल का साक्षी रहा, जब पंडित मदन मोहन मालवीय यहां की बेटी कुंदन देवी संग वैवाहिक बंधन में बंधे थे। वे जीवन भर उनकी छाया बनी रहीं और हर पथ पर उनका साथ दिया। पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे कर्मयोगी की ससुराल मीरजापुर में होने से जनपदवासियों को गर्व है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसंबर 1861 को इलाहाबाद में हुआ था। इलाहाबाद जन्मस्थली और वाराणसी उनकी कर्मस्थली रही है, लेकिन मीरजापुर भी महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के सानिध्य से दूर नहीं रहा। महामना की ससुराल नगर के बसनही बाजार स्थित बड़ी माता मंदिर के इमली महादेव पर है। मालवीय जी की शादी 1878 ई में नंदराम की इकलौती बेटी कुंदन देवी के साथ हुई थी।
प्रयागराज से चली बारात सात दिन बाद मीरजापुर पहुंची थी। विवाह के बाद सात दिनों तक बड़हार रहा। पूरी बारात सात दिनों तक आवभगत का लुत्फ उठाती रही और वैवाहिक रीतियां चलती रहीं। उस समय एक दिन, दो दिन, तीन दिन, सात दिनों का बड़हार का चलन था। दूर से आने वाले बाराती कुछ दिन रुककर ही वापस जाते।
इतिहासकार बताते हैं कि बैलगाड़ी से बारात आयी थी और तब 90 किलोमीटर की दूरी तय करने में सात दिन लगे थे। इसके बाद बारात जब वापस गयी तब भी पूरे सात दिन लगे। इस तरह से पंडित मालवीय की शादी की रस्में 21 दिनों में पूरी हुईं। सास-ससुर के निधन के बाद उनकी ससुराल में कोई नहीं है। ससुराल होने के चलते महामना का आना-जाना मीरजापुर में होता था। इमली महादेव स्थित लगभग 20 बाई 50 फीट का यह मकान आज भी मीरजापुर के लोगों को इतराने और महामना से जुड़े रहने का मौका देता है। भारत रत्न मिलने पर मना था जश्न : 24 दिसंबर 2014 को भारत सरकार ने पंडित महामना मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न देने की घोषणा की जिसके बाद बसनही बाजार के इमली महादेव मोहल्ले में जश्न मनाया गया।
मंडलायुक्त मनोज कुमार ने ली थी महामना के ससुराल की सुध : महामना के ससुराल के मकान की सुध 1998 में मंडलायुक्त मनोज कुमार ने ली थी। उन्होंने मकान पर शिलापट्ट लगवाया था। जिस पर लिखवाया कि महामना पंडित मदन मोहन मालवीयजी का विवाह स्थल पंडित नंदरामजी के इस मकान नंबर 559 मोहल्ला इमली महादेव में 1878 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीयजी की बारात इलाहाबाद से आई और इसी घर में उनका शुभ विवाह पंडित नंदराम की सुपुत्री कुंदन देवी के साथ 1878 ई. को संपन्न हुआ।
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