आज हेमंत सोरेन जी के "चोरी और सीनाजोरी" वाले भाषण पर बाबूलाल मरांडी की प्रतिक्रिया

 

टीम एबीएन, रांची। हेमंत जी ने कहा, अगर मैंने कोई जुर्म किया है तो मुझे सीधा गिरफ्तार करें, समन क्यों भेजते हो? तो, मुख्यमंत्री जी… आपको ज्ञात होना चाहिए कि हमारे देश में "कानून का राज" चलता है, आपकी पार्टी की तरह एक परिवार या किसी गुर्गों का नहीं… पूछताछ की प्रक्रिया भारतीय कानून और न्यायिक कार्यवाही का एक अटूट अंग है। अतः कृपया करके कानून का पालन करें और पूछताछ में शामिल हो… अगर आपके ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध होते हैं तो आपकी गिरफ़्तारी निसंदेह होगी… इसमें आपके कहने या ना कहने से कुछ नहीं होगा। आपने कहा “झारखंड वीरों की भूमि है। ये आपने बिलकुल सही कहा कि हमारा झारखंड वीरों की धरती है। भगवान बिरसा मुंडा समेत अनेक वीरों ने अपने खून से इस माटी को सींचा है। हमारे वीरों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर यहां के जल-जंगल-ज़मीन को बचाया है, परंतु आपने और आपकी कौरव सेना ने यहां के जल-जंगल-ज़मीन को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अवैध माइनिंग से आपने ज़मीन तो क्या यहां के पाताल तक का सौदा कर डाला, तो कृपया करके हमारे वीर महापुरुषों को ढाल बनाकर अपने संगठित कुकर्मों को मत छिपाइये। आपने कहा, कोर्ट कचहरी से डराया जा रहा है। तो मुख्यमंत्री जी, कोर्ट कचहरी से डराना क्या होता है? ये आपसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता। हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आपने एक ही दिन में कितने फर्जी मुकदमे किये हैं, ये राज्य की जनता जानती है। आपको बताने की जरूरत नहीं है। इन राजनैतिक षड्यंत्रों के लिए आपके परिवार की प्रसिद्धि किसी से छिपी नहीं है...। आपने पूछा “भाजपा और ईडी के ऑफ़िस में सुरक्षा क्यों बढ़ायी गयी है?” तो मुख्यमंत्री जी, आपके राज में पूरे प्रदेश में एक भय का माहौल है। व्यापारी वर्ग हो या डॉक्टर, कोई सुरक्षित नहीं, राज्य की राजधानी से लेकर सुदूरवर्ती गांवों के सामान्य वर्ग में भी भय का माहौल है। आपके पोषित और संरक्षित गुंडों से पूरे प्रदेश को सुरक्षा की जरूरत है। इन परिस्थितियों में विरोध के नाम पर प्रायोजित गुंडागर्दी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए आपके इस भययुक्त राज से जनता जल्द छुटकारा पाना चाहती है। आपने कहा, “हम झारखंडियों ने अभी कुछ किया ही कहां है, तो किस बात का डर लग रहा है?” तो मुख्यमंत्री जी, झारखंडी का मतलब केवल आपके पार्टी के कार्यकर्ता नहीं है। आपकी इस संकुचित मानसिकता पर तरस आती है। झारखंड के मूलवासी भी आपकी दलाली की दुनिया से सबसे ज़्यादा त्रस्त है और शीघ्र ही आपके कुकर्मों के सजा होने का इंतजार कर रहे हैं। अंत में मैं आपको यही कहना चाहूंगा कि आपके पाप और भ्रष्टाचार में भागीदार प्रेम प्रकाश, पंकज मिश्रा, अमित अग्रवाल और अन्य के जेल जाने के बाद आपकी स्थिति महाभारत के उस दुर्योधन की तरह हो गयी है जिसके अधर्मों का अंत नजदीक आ चुका है! याद रखियेगा... जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है... जय झारखंड...

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