अमृतकाल में देश के बदलाव पर जरूरी है विमर्श...

 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क (डॉ मेरी ग्रेस)। आजादी के अमृतोत्सव पर युवाओं से ‘देश के अतीत और वर्तमान’ विषय पर संवाद कार्यक्रम में उर्सूलाइन इंटर कॉलेज के सभागार में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुरलीधर नंदकिशोर ने हमारी ढाई हजार से अधिक छात्राओं को आजादी के अमृत उत्सव पर जिस प्रकार से देश की स्थिति से अवगत कराया, इसके लिए मैं abnnews24.com का शुक्रगुजार हूं। श्री मुरलीधर ने बताया कि पुणे के एक स्कूल को जिस प्रकार विश्व श्रेष्ठ स्कूल में चयनित किया गया है, उससे मेरा भी मन प्रसन्नचित हुआ। उन्होंने जानकारी दी कि नयी शिक्षा नीति बच्चों को विशेष क्षेत्रों के विशेषज्ञ ने विमर्श और उद्बोधन को शामिल किया है। लेकिन मैं विगत 20 वर्षों से अधिक से विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को बुलाकर छात्राओं को हर क्षेत्र की जानकारी के लिये प्रयास करती रही हूं। इसी क्रम में आजादी के अमृत उत्सव पर हमने पूरे साल ऐसे कार्यक्रम को आयोजित कर 75 साल पर 75 कार्यक्रम का एक संकल्प लिया है। इस कार्यक्रम में देश के अतीत से लेकर अबतक के उतार चढ़ाव की पूरी जानकारी छात्रों को दी गयी। एनके मुरलीधर ने इस कार्यक्रम में बच्चों को पूरे मनोयोग और उनके सवाल का जवाब भी दिया। कार्यक्रम में श्री मुरलीधर ने कहा कि आज देश जहां है उससे आगे ले जाने की जवाबदेही हमारे युवाओं की ही है। देश में 30 वर्ष से कम उम्र के 50 फीसदी लोग है जो पूरी दुनिया में भारत को सबसे युवा आबादी के तौर पर साबित करता है। एक युवा देश आजादी के 75 साल बाद तमाम कठिनाईयों से जूझते हुए जहां खड़ा है उसके आगे एक भव्य भारत का दृश्य उपस्थित होता है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश ने जिस प्रकार बाहरी आक्रमण को झेला और एक जुट रहते हुए विकास के रास्ते पर बढ़ता गया उससे हमारी निष्ठा से दुनिया कायल हो गयी। भारत दुनिया का सबसे समृद्ध देश था इस बात को मानने में कोई कठिनाई नहीं है लेकिन आज फिर से उस स्थान को पाने का संघर्ष कर रहा है यह बात भी सही है। आजादी और सेक्यूलर राष्टÑ के रुप में जिस प्रकार भारत ने अपनी गरीबी से लड़ाई लड़ी वह पूरे दुनिया के लिये अध्ययन का विषय है। ऐसा नहीं है कि यह आर्थिक स्थिति हमें सहजता से मिल गयी। आजादी के समय हमारा पहला बजट मात्र दौ सो करोड़ का था जबकि रक्षा पर 50 करोड़ खर्च करना होता था। हमारी चीन से शर्मनाक हार से हमारा मनोबल गिर गया लेकिन 1971 कि पाकिस्तान पर जीत के बाद भारत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हर दशक हम कुछ न कुछ विकास करते रहें लेकिन हमारी मिश्रत अर्थव्यवस्था का प्रयोग 1990 में बुरी तरह से विफल हो गया। फिर हमारी देश की सरकार ने नयी आर्थिक नीति अपनाकर देश को मात्र दस साल में एक आर्थिक शक्ति में बदल दिया। हमने दुनिया की सबसे बड़ी सड़क परियोजना स्वर्णिम चतुर्भुज आरंभ किया गया। बैंकिंग सेवा को विश्व स्तरीय बना दिया गया। शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, व्यापार, रक्षा, आइटी सहित हर क्षेत्र में विकास की गति तेज की गयी। आज का भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रुप में स्थापित हो चुका है। एक लंंबे समय तक देश गरीबी, युद्ध, हिंसा और अतंरराष्टÑीय षडयंत्र में उलझें रहने के बाद आज विश्व शक्ति बनने की ओर बढ़ रहा है। आज हमारे युवाओं के लिये जो देश बना है उसमें सुपर पॉवर बनने की पूरी क्षमता है। इस कारण आज युवा पहले से अधिक दायित्वबोध वाले बुद्धिमान होने चाहिए। युवा छात्राओं के मन में उठते सवाल : सवाल : बेरोजगारी की सबसे लगातार बढ़ती जा रही है? जवाब : हम बेरोजगारी की बात क्यों करते हैं? हम रोजगार की बात करें। यह सही है कि एक बड़ी संख्या ऐसी है जो काम नहीं कर रही है लेकिन दूसरी ओर देश में योग्य लोगों का भी अभाव है जो संकेत कर रहा है बेरोजगारी से ज्यादा परेशानी हमें स्किल्ड युवाओं की कमी का है। आज बंगलूरं में 88 हजार युवाओं को एक शहर में 60 लाख से अधिक पैकेज मिला है अगर हम अपने करियर की तैयारी पूरी मेहनत से करते हैं तो भारत ही नहीं पूरी दुनिया में भारतीय युवाओं की संभावना लगातार बढ़ रही है। सवाल : भ्रष्टाचार से पीड़ा होती है? जबाव- हां यह पीड़ा दायक है। लेकिन विकासशील देश में भ्रष्टाचार कैसे कम हो इस पर अतंरराष्टÑीय स्तर पर रिसर्च हो रहा है और काम हो रहा है। भ्रष्टाचार से समाज और देश कमजारे होता है। जैसे-जैसे समाज जागरुक होगा यह कम होता जा रहा है साथ ही आइटी के प्रयोग, सीधे पैसों के हंस्तातरण से भी स्थिति सुधरी है। सवाल : क्या धार्मिक उन्माद सही है? जवाब : नहीं धार्मिक उन्माद सही नहीं है। यह केवल एक राजनैतिक हथकंडा है। भारत की संस्कृति और समाज सहयोग की रही है। राजनीति में चुनाव जीतने के हथकंडा ही धार्मिक उन्माद को हवा देता है। लेकिन यह लगातार कम होता जा रहा है यह अलग बात है कि मीडिया में अधिकांश समय नकरात्मकता को महत्व दिया जाता है जिससे यह समस्या हमारे दिमाग में बैठ जाती है। अपराध एक मानसिकता है जिसे ्रकिसी धर्म से जोड़ा जाना गलत है। अपराधी किसी भी धर्म जाति या समुदाय का हो उसे सजा हो, समाज उसे सामाजिक दंड दे कानून उसे कानूनी दंड दे। सवाल : देश की राजनीति में अच्छे लोगों का अभाव है? जवाब : हां ऐसा है। लेकिन अब राजनीति में समाज के हर तबके के उच्च शिक्षा प्राप्त, अनुभवी और योग्य लोग आ रहें हैं साथ ही वे अनुभवी भी है। जैसे हमारे देश के रेल मंत्री अश्विणी वैष्णव आइआइटीयन हैं, प्रशासनिक अधिकारी रहे और अब फिर राजनेता बने वर्तमान में देश के रेल मंत्री है। देश में नयी शिक्षा नीति आ रही है जिससे हम कुछ बेहतर होने की उम्मीद कर सकते हैं। अशिक्षा तुलनात्मक कम हुई है। सकरात्मक सोच को बढ़ाने और नकरात्मक चिंता को कम करने समाप्त करने का एक बेहतर और सार्थक प्रयास। आजादी के अमृत काल पर सभी को शुभकामनाएं। (लेखिका उर्सूलाइन इंटर कॉलेज, रांची की प्राचाार्या हैं।)

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