एबीएन सेंट्रल डेस्क। आॅस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों को धरती की ऊपरी परत का 4 अरब साल पुराना एक विशाल टुकड़ा मिला है, जो आयरलैंड जितना बड़ा है। यह पृथ्वी के उस परत का हिस्सा है, जो इन अरबों वर्षों में तमाम उल्का पिंडों के वार से भी सुरक्षित रहे हैं और इनपर पर्वत निर्माण प्रक्रियाओं का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। यानी यह परत लगभग धरती के मूल स्थिति के रूप में ही बरकरार हैं और यही वजह है कि वैज्ञानिकों को इसमें मानव-जीवन के लिए कई तरह के संसाधन मिलने की संभावनाएं नजर आ रही हैं। पृथ्वी मूल रूप से तीन परतों में बंटी है- क्रस्ट (भू-पर्पटी), मैंटल (बीच का हिस्सा) और कोर (सबसे भीतर का हिस्सा)। कर्टिन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं को पश्चिम आॅस्ट्रेलिया के दक्षिण-पश्चिम में करीब 4 अरब साल पुराने क्रस्ट (भू-पर्पटी) के टुकड़े का प्रमाण मिला है। इसके लिए समुद्र के किनारों की रेत से खनीज की खोज करने वाले इंसान के बाल से भी सूक्ष्म लेजर का इस्तेमाल किया गया है। यह शोध कर्टिन स्कूल आॅफ अर्थ एंड प्लैनेटरी साइंसेज के शोधकतार्ओं ने किया है। इस शोध से जुड़े एक शोधार्थी मैक्समिलियन ड्रॉल्नर के मुताबिक इस नई खोज से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि धरती एक निर्जन भूमि से कैसे जीवन के लायक बनी। वैज्ञानिक भू-पर्पटी या पृथ्वी की ऊपरी परत की जिस 4 अरब साल पुराने टुकड़े की बात कर रहे हैं, उसका आकार आयरलैंड के बराबर बताया जा रहा है। ड्रॉल्नर ने कहा, इस बात के साक्ष्य हैं कि आयरलैंड के आकार के चार अरब साल पुराने टुकड़े ने पिछले कुछ अरब वर्षों में पश्चिमी आॅस्ट्रेलिया के भूवैज्ञानिक विकास को प्रभावित किया है और वाशिंगटन में बने चट्टानों में भी यह कालखंड एक प्रमुख घटक है। वैज्ञानिकों के मुताबिक पृथ्वी की ऊपरी परत का यह टुकड़ा आॅस्ट्रेलिया, भारत और अंटार्कटिका के बीच पहाड़ों के निर्माण होने की प्रक्रियाओं से भी बचा रहा है और अभी भी पश्चिमी आॅस्ट्रेलिया के दक्षिण-पश्चिमी कोने के नीचे दसों किलोमीटर की गहराई में मौजूद है। शोधकतार्ओं का कहना है कि जब वह अपनी पड़तालों की तुलना पहले से मौजूद डेटा से करते हैं तो ऐसा लगता है कि पूरी दुनिया के कई इलाकों में भू-पर्पटी के निर्माण और संरक्षण का कालखंड एक समान ही लगता है। उनके मुताबिक, लगभग चार अरब साल पहले पृथ्वी के विकास में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा करता है। क्योंकि, उल्कापिंडों की बमबारी कम हो गई, जमीन की ऊपरी परत जम गयी और जीवन की शुरुआत होनी शुरू हो गई। कर्टिन स्कूल आॅफ अर्थ एंड प्लैनेटरी साइंसेज में मिनरल सिस्टम ग्रुप के टाइम्सस्केल्स के शोध पर्यवेक्षक डॉ मिलो परहम ने कहा है कि इस क्षेत्र का पहले कोई बड़े पैमाने पर अध्ययन नहीं किया गया था; और जब मौजूदा डेटा की तुलना की गई तो परिणाम दिलचस्प दिखे। काफी नई जानकारी सामने आई। परहम का कहना है, क्रस्ट के पुराने टुकड़े का किनारा महत्वपूर्ण क्रस्टल सीमाओं का संकेत करता है, जो यह बताता है कि आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण खनिजों की खोज कहां की जाए।
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