टीम एबीएन, रांची। पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए झारखंड, बंगाल और ओडिशा के राज्य सरकार के द्वारा लगाये जा रहे सेस की तुलना की है।
अपने पोस्ट में चंपाई सोरेन ने कहा कि क्या आपको पता है कि झारखंड में कोयला एवं लौह अयस्क जैसे खनिजों की कीमतें पड़ोसी राज्यों से काफी ज्यादा हैं? इसके पीछे मुख्य कारण राज्य सरकार द्वारा मनमाने ढंग से लगाया जा रहा सेस है। उदाहरण के तौर पर थर्मल कोयला (G11) झारखंड में ₹2458 प्रति टन है, जबकि पश्चिम बंगाल में इसकी कीमत ₹1741 तथा ओडिशा में ₹1708 है।
इस परिस्थिति में कोई भी ग्राहक झारखंड की जगह पड़ोसी राज्यों का कोयला ही खरीदना पसंद करेगा, जो उसे ₹700-750 प्रति टन सस्ता पड़ेगा। चंपाई सोरेन ने कहा कि जब कोयला खनन में लगी सभी कंपनियों की कीमतें एक समान है, तो फिर अंतर टैक्स/ सेस से ज्यादा सरकार की नीयत का है। कांग्रेस ने इस देश में तथा कई राज्यों में लगातार कई दशकों तक राज किया है, तो उन्हें सब कुछ पता है।
लेकिन उसके बावजूद यहाँ सरकार ने जान बुझ कर अत्यधिक सेस लगाया हुआ है, ताकि ग्राहक खनन कंपनियों से कोयला ना खरीद कर, अवैध कारोबारियों से खरीदें। उस अवैध डील में राज्य सरकार को ना रॉयल्टी मिलेगी, ना DMFT, ना NMET, ना GST... लेकिन सत्ता के दलालों का धंधा चलेगा, और यही इनका मुख्य मकसद है।
पूरे देश में सरकारी स्तर पर अवैध कारोबार को संरक्षण देने का आपको ऐसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि जब केन्द्र सरकार ने इस अवैध बिजनेस पर MMDR संशोधन कानून के जरिए रोक लगाने का प्रयास किया, तो ये लोग भोले-भाले आदिवासियों - मूलवासियों को इसे झारखंड के अधिकारों पर हमला की तरह दिग्भ्रमित करने लगे।
झारखंड की जनता बहुत सीधी-सादी है, इन राजनैतिक दांव-पेचों को नहीं समझती, लेकिन उनके इस भोलेपन का राजनैतिक फायदा नहीं उठाया जाना चाहिए। एक बार अगर जनता के सामने आपकी असलियत खुलेगी, तो फिर जो होगा, वह आपके कल्पना से परे होगा।
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