एबीएन एडिटोरियल डेस्क। राजनीतिक दल भारतीय जनसंघ/भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी जम्मू कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानते थे। जम्मू कश्मीर में शेष भारतीयों के लिए प्रवेश के लिए परमिट, अलग झंडा और वहां के लिए विशेष कानून अनुच्छेद 370 का वे प्रबल विरोधी थे।
जम्मू कश्मीर के जमीन से अपना विरोध प्रकट करने के लिए वे 11 मई 1953 को बिना परमिट बनवाए श्रीनगर गए तो वहां की पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल में बंद करते हुए नजरबंद कर दिया। बताया गया कि जेल में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और 23 जून 1953 को जेल में रहते हुए उनकी रहस्य में मृत्यु की घोषणा कर दी गई। उस समय डॉक्टर साहब की आयु मात्र 52 वर्ष की थी।
भारतीय जनता पार्टी 23 जून को उनके राष्ट्र के प्रति समर्पण, देशभक्ति एवं बलिदान के सम्मान में बलिदान दिवस के रूप में मानती चली आ रही है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी, राष्ट्रभक्त, दूरदर्शी, अमर शहीद, भारत को उसके पुरातन संस्कृति एवं दिशा की और उन्मुख करने वाले राजनीतिज्ञ डा.श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रेरणादायक स्मृति को शत-शत नमन।
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