टीम एबीएन, रांची। आजसू छात्र संघ, रांची द्वारा झारखंड सरकार की नयी अधिसूचना (2026) का कड़ा विरोध किया जाता है, जिसमें जिला स्तर पर क्षेत्रीय भाषाओं की सूची से उर्दू भाषा को हटा दिया गया है। यह निर्णय न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि उर्दू भाषी अभ्यर्थियों के साथ सीधा अन्याय और भेदभाव भी है।
वर्ष 2022 की अधिसूचना में उर्दू को लगभग सभी जिलों में स्थान दिया गया था, जिससे हजारों अभ्यर्थियों को समान अवसर मिला। लेकिन 2026 की अधिसूचना में उर्दू को हटाना यह स्पष्ट करता है कि सरकार एक वर्ग विशेष को नजरअंदाज कर रही है। आजसू छात्र संघ के जमाल गद्दी ने कहा कि उर्दू झारखंड की महत्वपूर्ण और मान्यता प्राप्त भाषा है। इसे परीक्षा से बाहर करना संविधान की भावना और समान अवसर के अधिकार के खिलाफ है।
आजसू छात्र संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार इस निर्णय को जल्द वापस नहीं लेती है, तो संगठन राज्यभर में छात्रों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन एवं आंदोलन करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। अंत में, आजसू छात्र संघ सरकार से अपील करता है कि सभी भाषाओं के साथ समान व्यवहार करते हुए उर्दू को पुन: शामिल कर न्याय सुनिश्चित किया जाये।
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