टीम एबीएन, रांची। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखंड द्वारा 20 से 22 मार्च 2026 तक शौर्य सभागार, जैप, रांची में तीन दिवसीय अखिल भारतीय बसंत कला शिविर प्रकृति-2026 का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह विशेष कला शिविर प्रकृति संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता को सशक्त बनाने और कला के माध्यम से पर्यावरणीय संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का एक प्रेरणादायक प्रयास है।
यह आयोजन वैश्विक स्तर पर मनाए जाने वाले तीन महत्वपूर्ण अवसरों विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च), इंटरनेशन डे आॅफ फोरेस्ट (21 मार्च) एवं वर्ल्ड वाटर डे (22 मार्च) के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है, जिससे इसकी प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।
इस कला शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आमंत्रित प्रख्यात एवं नवोदित कलाकार अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। कलाकार वन संरक्षण, जल संरक्षण एवं जैव विविधता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर लाइव पेंटिंग के माध्यम से प्रकृति के प्रति अपनी भावनाओं को सजीव रूप देंगे। इस वर्ष का केंद्रीय संदेश बैक टू नेटचर प्रकृति की ओर लौटें है, जो आधुनिक जीवनशैली में प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित करने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ दिप प्रज्वलन और गणेश वंदना के साथ किया गया। इसके बाद श्रीकांत वर्मा, डीएफओ, (पब्लिसिटी एंड एक्सटेंशन डिवीजन) ने सभागार में बैठे सभी का स्वागत करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक कला शिविर नहीं, बल्कि प्रकृति, वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी को पुन: स्मरण करने का भी एक महत्वपूर्ण क्षण है।
उन्होंने कहा कि प्रकृति हमें जीवन देती है, और उसकी रक्षा करना हमारा धर्म है। उन्होंने कलाकारों को संबोधित करते हुए कहा कि कला एक ऐसी भाषा है, जो बिना शब्दों के भी बहुत कुछ कह जाती है। जहां शब्द कम पड़ जाते हैं, वहां कला बोलती है। इसके बाद गौरैया बुकलेट, एवं कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया। इसके पश्चात कार्यक्रम की शुरूआत की गई और एक अनोखे संगीत समूह द्वारा सुरों एवं बेहतरीन संगीत प्रस्तुत किया गया जिसने खूबसूरती से साबित किया कि जुनून किसी पेशे का मोहताज नहीं होता—द पैशनेट एमेच्योर्स।
कार्यक्रम में आगे बढ़ते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख संजीव कुमार ने कलाकारों, विद्यार्थियों, कला संस्थानों का स्वागत करते हुए कहा कि हमारे वन केवल हरियाली का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे हमारे जल, वायु, जैव विविधता और जीवन चक्र के आधार स्तंभ हैं। वन्यजीव हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं, और उनका संरक्षण ही धरती के संतुलन को बनाए रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि कला के माध्यम से वन, प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना।
उन्होंने कलाकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आपकी कल्पनाएं, आपके रंग, और आपकी रचनाएं निश्चित ही इस शिविर को यादगार बनायेंगी। कार्यक्रम में रांची के विभान नामचीन कॉलेज के करीबन 400 बच्चों ने भाग लिये। बच्चों के बीच इंटर कॉलेज क्विज एवं एक्सटेंपोरे प्रतियोगिता का आयोजन कराया गया एवं विजेताओं को पुरस्कृत कर सम्मानित भी किया गया।
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