टीम एबीएन, रांची। शनिवार को संस्कृत विभाग, रांची विश्वविद्यालय, रांची एवं पूर्ववर्ती छात्र संघ ने दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध-संगोष्ठी का समापन समारोह सरला बिरला विश्वविद्यालय के योग एवं नैचुरोपैथी और आर्ट, कल्चर एंड स्पोर्ट संकाय की अध्यक्ष प्रो. नीलिमा पाठक की अध्यक्षता में दीप प्रज्ज्वलित करके शुभारंभ किया गया। उन्होंने ज्ञान विज्ञान की परंपरागत विद्या को शिक्षक के माध्यम से शिष्य को देने की बात कही न कि औपचारिक रूप से।
पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ मधुलिका वर्मा ने वैदिक श्लोक के माध्यम से स्वागत संबोधन किया। जिसमें मुख्य अतिथि स्वामी परिपूर्णानंद सरस्वती, (चिन्मय मिशन) ने वेद-वेदाङ्ग में भारतीय ज्ञान परंपरा के वास्तविक स्वरूप को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि संस्कृत को रोजगार मात्र तक सीमित न कर दिया जाए। विशिष्टातिथि कुलसचिव डॉ गुरुचरण साहू ने भारतीय ज्ञान परंपरा के ज्ञान को इस प्रकार के सेमिनार के द्वारा जन-जन तक पहुंचने के प्रयास को सराहा।
सम्मान्यतिथि छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष, रांची वि. वि., रांची प्रो. सुदेश कुमार साहू ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी के नौजवान छात्रों को लुप्त हुई भारतीय ज्ञान परंपरा को समाज के उद्धार हेतु लोगों के समक्ष लाना होगा। मंच संचालन मारवाड़ी कालेज के डॉ. राहुल कुमार ने करते हुए कार्यक्रम को सुचारू रूप से संचालित करते हुए संपन्न किया।
राष्ट्रीय शोध-संगोष्ठी में द्वितीय दिन तक कुल 120 से ज्यादा शोध पत्र पढ़े गए। कुल शोध पत्रों में से तीन सर्वश्रेष्ठ पत्रों को प्रो. अयोध्या प्रसाद सिंह स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मौके पर डॉ रजनी गोस्वामी, डॉ पारंगत खलखो एवं डॉ जीतेश पासवान, उदय कर्मकार और डॉ भारती द्विवेदी ने सभी के प्रति आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रकट किया।
संगोष्ठी में डॉ मीना शुक्ल, अरुण बसंत, डॉ मीरा सिंह, डॉ जानकी देवी, डॉ शैलेश मिश्र, डॉ श्रीप्रकाश सिंह, डॉ सविता उरांव, डॉ धीरेंद्र दुबे, डॉ एसके घोषाल, डॉ जगदम्बा प्रसाद, डॉ लक्ष्मी कुमारी, शोधार्थी गण व अन्य उपस्थित थे।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse