टीम एबीएन, रांची। वरिष्ठ समाजसेवी धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि देश के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विकास में ब्राह्मण समाज की भूमिका सदैव मार्गदर्शक रही है। किंतु वर्तमान समय में यह समाज उपेक्षा, विभाजन और राजनीतिक शोषण का सामना कर रहा है।
अलग-अलग जाति और वर्ग अपने हितों को लेकर संगठित हो चुके हैं, जबकि ब्राह्मण समाज बिखरा हुआ है और उसकी समस्याओं पर न तो समाज के भीतर समुचित चिंता हो रही है और न ही राजनीतिक स्तर पर ठोस पहल दिखाई दे रही है।
धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि ब्राह्मण समाज के भीतर आज भी बड़ी संख्या में लोग गरीबी, बेरोजगारी, असुरक्षा और सामाजिक उपेक्षा में जीवन यापन कर रहे हैं। राजनीतिक दल चुनाव के समय समाज की भूमिका को महत्व देते हैं, लेकिन बाद में उनके सम्मान, सुरक्षा और भविष्य से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इससे समाज में निराशा बढ़ रही है, जो सामाजिक समरसता के लिए घातक है।
उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में रहने वाले भारत के विभिन्न प्रांतों और भाषाओं से जुड़े ब्राह्मण, जो समाज के प्रति क्रियाशील हैं चाहे वे किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हों, सामाजिक संगठनों में कार्यरत हों या धार्मिक क्षेत्र में सक्रिय हों सभी को एक साझा मंच पर लाने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से आगामी जनवरी माह में एक विशेष तिथि निर्धारित कर एक व्यापक चिंतन-बैठक आयोजित की जायेगी।
इस बैठक में समाज की एकता, समरसता, बहन-बेटियों की सुरक्षा, बच्चों के भविष्य, सामाजिक सम्मान और समग्र विकास पर गंभीर विचार किया जायेगा। धर्मेंद्र तिवारी ने सभी ब्राह्मण बंधुओं से आह्वान किया कि वे दलगत और प्रांतीय सीमाओं से ऊपर उठकर विचार, विवेक और संवाद के माध्यम से समाज, राज्य और राष्ट्र के कल्याण हेतु एकजुट हों। उक्त जानकारी धर्मेंद्र तिवारी (9431115714) ने दी।
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