कथनी करनी था एक समान
मां भारती के चरणों में
सर्वस्व समर्पण ध्येय अरमान ,
हम रहें या न रहें
तेरा वैभव अमर रहे मां
थी यही उनकी पहचान
अटल जी कहा करते थे
हे प्रभु इतनी ऊंचाई
न देना मुझे कि गैरों को
गले लगा न सकूं ,
जमीन पर रहने वालों से
आंखें अपनी मिला न सकूं
सरकारें एक जैसी होती है
सत्ता का चरित्र समान होता है
सत्ताधारी का अपना
विशेष अरमान होता है ,
यह अलग बात है कि
चरित्र बदलने का
हम प्रयास कर रहे हैं
राजनीति तो माध्यम है
राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हो
ऐसा अभ्यास कर रहे हैं
दूसरों पर हंसना और बात है
खुद पर हंसना बड़ी बात है
हास्य-रस शक्ति देता है
जूझने का बल देता है ,
कभी-कभी वीर रस
जो काम नहीं कर पाता
चुटकी भर हास्य से
जीवन बादल जाता है
नव चेतना निकल आता है
हम आज के वर्तमान हैं
अटल जी का विशाल व्यक्तित्व
कार्यकर्ताओं के सम्मान हैं
वह हैं हमारे प्रेरणा स्रोत ,
हमारा हर एक कार्य
अटलजी के आदर्श से
है समर्पित ओत-प्रोत..
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