टीम एबीएन, रांची। श्री श्वेताम्बर जैन मंदिर डोरंडा मे सुबह भगवान की प्रक्षाल पूजा, अभिषेक एवं स्नात्र पूजा बहुत ही आनंद उल्लास से सम्पन्न हुई। तत्पश्चात स्वध्यायी श्री जिनांग धीरेन साह एवं हर्षिल सुरेश साह द्वारा आज कल्प सूत्र वांचन में आगे के पाठ में श्रद्धालुओं को बताया गया जिसमें बताया गया कि आगम में तीर्थंकर श्रीआदिनाथ भगवान, श्री पार्श्वनाथ भगवान, श्री नेमिनाथ भगवान, श्री महावीर भगवान के जीवनी के बारे में विस्तृत रूप से वर्णन किया गया हैं।
भगवान महावीर को साढ़े बारह वर्ष घोर उपसर्ग आये परंतु भगवान किंचित मात्र भी विचलित नहीं हुए उन्हें ज्ञात था कि यह किये गये कर्मों का परिणाम हैं सो वह कष्टकारी उपसर्गों में भी निरंतर शांत व मौन रहे। सभी तीर्थंकरों का जीवन एक तरफ और भगवान महावीर का जीवन एक तरफ कहा जा सकता हैं। प्रभु परमात्माओं के जीवन के छोटे से अंश से भी हम सभी अपने जीवन को सुधार सकते हैं एवं सुन्दर बना सकते हैं।
प्रवचन में आगे बताते हुए कहा कि पहले बच्चों के नाम उनके गुणों, भगवान, महापुरुषों के नाम के आधार पर रखा जाता था तो बच्चों का जीवन एवं कार्यशैली भी वैसे ही होती थी, आजकल अधिकतर बच्चों के नाम अंग्रेजी नामों, फिल्मी नाम आधारित रखा जाता हैं सो आज के बच्चों का जीवन संस्कार विहीन हो गया हैं। हमारे शास्त्रों में अनंत ज्ञान लिखित हैं जिससे कि व्यक्ति अपने जीवन को सुधार सकता हैं।
हमें अपने बच्चों में भी बचपन से ही संस्कार डालने चाहिए, परमेश्वर भगवान कि वाणी सुनानी चाहिए, उनकी जीवनी श्रवण, मंदिर में पूजा, धर्म ध्यान, ज्ञान शिक्षा देनी चाहिए साथ ही विवेकशील तथा संयमित बने इस पर जोर देना चाहिए। आज मंदिर में प्रवचन में प्रमोद बोथरा, बलबीर जैन, संतोष बेगानी, प्रभा बोथरा, संपत लाल रामपुरिया, राजकुमार रामपुरिया, लाल जी सेठिया आदि के साथ श्रद्धालुओं की अच्छी उपस्थिति थी।
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