रांची में मनाया गया संत जोन मेरी वियान्नी का पर्व

 

टीम एबीएन, रांची। आज रांची काथलिक महाधर्मप्रांत  के सभी पुरोहितों के लिए विशेष दिन रहा। क्योंकि संत मारिया गिरजा महा गिरजाघर में सभी पुरोहितों के संरक्षक संत जोन मेरी वियान्नी का पर्व हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाया गया।  रांची कैथोलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने मिस्सा बलिदान अर्पित किया।

काथलिक ख्रीस्त विश्वासी संत जोन मेरी वियान्नी को सभी पुरोहितों के संरक्षक के रूप में आदर दिखाते हैं एवं उनके माध्यम से सभी पुरोहितों के लिए विशेष प्रार्थना की जाती हैं। संत जोन मेरी वियान्नी को त्याग, प्रार्थना एवं सादगी पूर्ण जीवन का आदर्श माना जाता है। 

इसी अवसर पर महाधर्माध्यक्ष विंसेंट ने संत मारिया महागिरजाघर में महाधर्मप्रान्त के पुरोहितों के साथ मिस्सा बलिदान अर्पित किया। उन्होंने अपने धर्मोपदेश में संत जोन मेरी वियान्नी के सादगी पूर्ण जीवन से शिक्षा लेकर उनके समान त्याग, प्रार्थना एवं सहोकार का जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। 

मिस्सा के अंत में पल्ली के काथलिक सभा, महिला संघ और युवा संघ के सदस्यों ने उपस्थित सभी पुरोहितों को अपने मधुर संगीत द्वारा स्वागत किया। उन्हें फूल गुच्छ दे कर उनका सम्मान किया। महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद ने उनके प्रार्थना एवं सहयोग के अपना आभार व्यक्त किया।

संत जॉन मेरी वियानी का जीवन

  • पूरा नाम: जीन-बैप्टिस्ट मारिया वियानी (Jean-Baptiste Marie Vianney)
  • जन्म: 8 मई 1786 – डार्डी, फ्रांस
    निधन: 4 अगस्त 1859 – आर्स, फ्रांस
  • घोषित संत: 1925 में पोप पायस ग्यारहवें (Pope Pius XI) द्वारा
  • उपाधि: पुरोहितों के संरक्षक संत

जीवन परिचय

संत जॉन मेरी वियानी का जन्म एक धार्मिक किसान परिवार में हुआ था। उनका बचपन फ्रांस की क्रांति के दौरान बीता, जब चर्चों पर प्रतिबंध लगे हुए थे और गुप्त रूप से धर्म का पालन करना पड़ता था। बाल्यकाल से ही वे अत्यंत श्रद्धालु और प्रार्थनाशील थे।

उन्हें पढ़ाई में कठिनाइयाँ थीं, विशेष रूप से लैटिन भाषा में, जो उस समय पुरोहित बनने के लिए आवश्यक थी। लेकिन उनकी प्रबल श्रद्धा, धैर्य और संकल्प ने उन्हें आगे बढ़ाया। कड़ी मेहनत और ईश्वर में अटूट विश्वास के कारण वे 1815 में एक पुरोहित के रूप में अभिषेक किए गए।

उन्हें एक छोटे से गाँव आर्स में भेजा गया, जो उस समय आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत ही उदासीन था। लेकिन पुरोहित वियानी ने अपने उपदेशों, तपस्या, विनम्रता और विशेष रूप से कन्फेशन (पापस्वीकार) के माध्यम से हजारों लोगों को ईश्वर की ओर लौटाया।

वह दिन में 16-18 घंटे तक कन्फेशन सुनते थे। दूर-दूर से लोग उनके पास आत्मिक मार्गदर्शन के लिए आते थे। उनका जीवन पूरी तरह से प्रार्थना, उपवास, सेवा और विनम्रता में लीन था।

उनकी विशेषताएँ:

  • अत्यंत सरल जीवनशैली
    गहरी प्रार्थना और तपस्या का जीवन
  • पापियों को पश्चाताप की ओर मोड़ने की अद्भुत क्षमता
  • करुणामय और आत्मीय व्यवहार

आज भी उनके शरीर के अवशेष अविनाशी स्थिति में हैं, जो आर्स, फ्रांस में एक विशेष स्थान में रखे गए हैं। संत जॉन मेरी वियानी हमें सिखाते हैं कि यदि हमारे पास दृढ़ विश्वास, प्रार्थना, और सेवा की भावना हो, तो हम किसी भी कठिनाई को पार कर सकते हैं। वे सभी पुरोहितों के लिए प्रेरणा हैं कि कैसे एक साधारण जीवन जीते हुए भी हम असाधारण आत्मिक फल उत्पन्न कर सकते हैं।

इस विशेष पर्व अवसर पर रांची कैथोलिक महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद,  संत मारिया महागिरजाघर के पल्ली पुरोहित फाo आनंद डेविड खलको, फाo तोबियास टोप्पो, फाo थियोदोर टोप्पो, फाo प्रदीप कुमार, फ़ा o प्रदीप कुमार तिर्की, 50 अन्य पुरोहितगण, धर्मबहनें   एवं हज़ारों की संख्या में ख्रीस्त विश्वासी शामिल रहे।

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