टीम एबीएन, रांची। यह हम सब जानते हैं कि जब तक हवाई जहाज में पेटी बांधने का संकेत आन रहता है तब तक यात्रियों को सीट की बेल्ट (पेटी) खोलनी नहीं हैं और अपने स्थान से उठना भी नहीं है। ऐसा यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए होता है। हवाई जहाज के उड़ने या उतरने तथा मौसम खराब होने के समय पेटी बांधे रहने का संकेत आन रहता है क्योंकि उस समय हवाई जहाज बहुत हिलता है और अगर यात्री ने सीट की पेटी नहीं बांधी है तो उसे चोट लगने की संभावना होती है। अभी हाल में मैं भुबनेश्वर से हवाई जहाज से रांची आ रहा था।
जहाज के उड़ते समय जहाज के कप्तान ने नियमानुसार सीट की पेटी बांधने का संकेत आन कर दिया। अभी जहाज भुवनेश्वर से उड़ा ही था व पेटी बांधे रहने का संकेत आन ही था कि एक यात्री ने अपनी सीट की पेटी खोल दी और सीट से उठने लगा। तुरंत एयर होस्टेस ने माइक पर घोषणा की कि अपने स्थान पर अभी बैठे रहें और सीट बेल्ट भी बांध लें। पर वह यात्री नहीं माना। विमान में यह घोषणा बार-बार की गयी पर वह यात्री नहीं माना।
शायद वो अपनी सीट बदलना चाह रहा था। आखिरकार एयर होस्टेस को अपनी सीट से उठकर उसके पास जाकर उसे तेज शब्दों में समझाना पड़ा कि अभी आप ऐसा नहीं कर सकते हैं; सिर्फ़ कुछ मिनट और प्रतीक्षा कर लें। पर वह यात्री तुरंत फिर भी नहीं माना और बहुत देर तक एयर होस्टेस से बहस करता रहा। और इसी घटना से मुझे आज के इस लेख का विषय मिल गया कि हम भारतीय नियमों को पालन करने में इतनी कोताही क्यों करते हैं? क्यों हम किसी भी नियम को जल्दी स्वीकार नहीं करते हैं? क्यों नियम को तोड़ना हम अपनी शान समझते हैं?
आप उपरोक्त घटना को ही लें। एयर होस्टेस उस यात्री को नियम पालन करने को ही तो कह रही थी, जो कि यात्री की शारीरिक सुरक्षा के लिए ही था। पर इसके बावजूद वह यात्री एक साधारण से नियम को पालन करने में परेशानी महसूस कर रहा था। हम लोग सड़कों, कार्यालयों, सार्वजनिक स्थलों, स्कूल-कॉलेज आदि के नियम को पालन करने में हमेशा असहजता महसूस करते हैं और पहला अवसर मिलते ही नियम को तोड़ते हैं या तोड़ने की चेष्टा करते हैं।
अभी रांची में तीन फ्लाइओवर एक साथ बनने के कारण सड़क जाम की समस्या हो रही थी। और यह सड़क जाम की समस्या लोगों के अनुशासन हीनता के कारण ही आ रही थी । लोग सड़क पर जरा सा जाम पाते ही अपने बाएं तरफ से सड़क पर चलने के नियम को तोड़कर दायें तरफ वाली सड़क में घुस जाते थे जिस तरफ से ट्रैफिक को आना है। इसके कारण दोनों तरफ की सड़क जाम हो जाती व लोग घंटों जाम में फंसे रहते।
पुलिस वाले बाद में बल प्रयोग कर जाम हटाते। मैंने पाया कि लोग अगर नियम पालन कर अपने बायीं तरफ सड़क पर ही जाम हटने की प्रतीक्षा करते रहते तो कुछ मिनट में निकल जाते। पर उनको नियम तोड़ना ज्यादा सही लगता, भले उसके लिए वे घंटों सड़क पर फंसे रहें। आज हमारे समाज के पीछे रह जाने का कारण ही नियम की अवहेलना करना है। जिसे जहां अवसर मिलता है वहीं वो नियम की अवहेलना करना चाहता है।
इस नियम तोड़ने या नियम को पालन ना करने की प्रवति ने हमारे देश को इतने वर्षों तक विकास नहीं करने दिया । बल्कि कई विदेशी कंपनियों हमारे देश में इसी अनुशासनहीनता के कारण आना ही नहीं चाहती थीं। आज जब देश विकास के रास्ते पर अग्रसर हैं और एक विकसित राष्ट्र होने जा रहे हैं, हमें इस नियम पालन न करने की आदत से बचना ही होगा। (लेखक सीएमए कर सह वित्त सलाहकर हैं।)
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