प्राचीन और अवार्चीनकाल में भी युद्ध के क्षेत्र में योग के कौशल को परखा जा चुका है

 

स्वामी मुक्तरथ 

एबीनएन एडिटोरियल डेस्क। शनिवार को डीएवी पब्लिक स्कूल बरियातू में स्वामी मुक्तरथ के सान्निध्य में 11वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पूर्वाभ्यास कार्यक्रम चलाया गया। इसमें हजारों बच्चों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए सत्यानंद योग मिशन रांची के अध्यक्ष स्वामी मुक्तरथ ने कहा कि योग बहुत शक्तिशाली विद्या है। यह तंत्र से निकली हुई एक शाखा है जिसके प्रथम गुरु भगवान शिव हैं। 

वैज्ञानिक प्रमाणिकता के साथ योग को सिद्ध करने वाले वर्तमान युग के प्रथम गुरु बिहार योग विद्यालय मुंगेर के संस्थापक परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती हुए जिन्होंने संपूर्ण विश्व में योग को स्थापित किये। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस इन्हीं योगियों के प्रयास का फल है। 

योग के प्रभाव को प्राचीनकाल से हमलोग देख रहे हैं, जब भारत के सात ऋषियों के नाम पर आकाश के सात तारों का नाम पड़ा था, जिसे हम सप्तऋषि के नाम से जानते हैं। गौरव की बात यह है कि वर्तमान समय में भी नाशा ने शिवानंद गुरु-शिष्य परंपरा के तीन योगियों के नाम से आकाश के तीन तारों का नामकरण कर दिया है जो हैं स्वामी शिवानंद, स्वामी सत्यानंद और स्वामी निरंजनानंद। 

महाभारत के युद्व में जब अर्जुन विषाद में पड़ा था तो भगवान कृष्ण ने इसी योग की शिक्षा को देकर उन्हें अवसाद से मुक्ति दिये थे और युद्ध कौशल में रणविजय बनाये थे और इस काल में जब डॉ एपीजे अब्दुल कलाम डिप्रेशन में फंसे तो शिवानंद का योग उन्हें महान वैज्ञानिक बना दिया। युद्धक्षेत्र में योग के प्रभाव को कारगिल युद्ध में देखा जा चुका है। 

दानापुर मिलिट्री छावनी में बिहार योग विद्यालय के संन्यासियों के द्वारा सैनिकों का दो दल बनाकर एक को योग और दूसरे को व्यायाम कराया जाता था। संयोग से कारगिल वॉर में योग करने वाले दल को वहां भेजा गया जो बेहद ही कारगर सिद्ध हुआ। इन सैनिकों का हृदय गति, श्वांस की क्षमता बहुत अच्छी थी, इनकी मारक क्षमता यानी निशाना बहुत अच्छा था और स्टेमिना भी ज्यादा देर तक बनी रहती थी।  

आज तो योग की उपयोगिता और भी बढ़ गयी है क्योंकि अब न तो बच्चे साइकिल चलाते हैं न ही फुटबॉल खेलते हैं और न ही संतुलित भोजन करते हैं। यानि अब लगभग लोगों का शारीरिक श्रम नही होता है। शारिरिक श्रम नहीं होने से न तो लोग थकते हैं और न ही उन्हें अच्छी नींद आती है। जीवनशैली बिल्कुल खराब होते जा रही है, मोबाईल की आदत आंखों को दिमाग को और नींद को बर्बाद कर रही है। ऐसे में कुछ शारिरिक व्यायाम और प्राणायाम, मेडिटेशन, जल नेति तथा ध्यान करने की आवश्यकता है। 

डीएवी बरियातू के प्राचार्य एस के मिश्रा जी स्वामी मुक्तरथ जी को पुष्पगुछ और शॉल से स्वागत किये। श्री मिश्रा ने कहा कि शारिरिक शौष्ठव और मोरल को डेवलप किये बगैर अच्छा इंसान बनना कठिन है। बच्चों को नियमित रूप से योग करना चाहिए। हर गार्जियन का यह कर्तव्य बनता है कि बच्चों को प्रात:काल में योगाभ्यास करने की प्रेरणा को जागृत करें, उन्हें योग करने की सुविधा दें तभी आप के बच्चे में संस्कार का संवर्धन होगा और आज्ञाकारी भी बनेंगे। आप के सुख-दु:ख में खड़े उतरेंगे। श्री रोहित कुमार और केशव कुमार ने योगाभ्यास की प्रायोगिक शिक्षा का संचालन किया।

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