कोडरमा : सांस्कृतिक कार्यक्रम में बच्चों ने बिखेरा जलवा

 

समाज के उत्थान का प्रतीक बना महोत्सव

स्वजातीय एकता का प्रतीक बन चुका है यह महोत्सव : प्रदीप भदानी

टीम एबीएन, कोडरमा। झुमरी तिलैया मां मथुरासिनी महोत्सव के अंतिम दिन भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के बच्चों ने शानदार नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। महोत्सव ने एक बार फिर समाज की एकजुटता, संस्कृति और समृद्धि का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में समाज के 22 बच्चों ने एक से बढ़कर एक नृत्य प्रस्तुत किये। अदविका एकघरा ने झूठ बोले कौआ पर धमाकेदार प्रस्तुति दी, वहीं आरिनी भदानी ने ठुमकेश्वरी गीत पर मंच पर जलवा बिखेरा। आरव भदानी ने हट जा बाजू, आने दे हवा, मुस्कान भदानी ने लंदन ठुमका दे और श्रीसा भदानी ने उई अम्मा पर जबरदस्त प्रस्तुति दी। 

समृद्धि सेठ, सताक्षी कुमारी, तनमय पहाड़ी, रिद्धिया लोहानी सहित सभी बच्चों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिया।नृत्य के बाद सन्नी ने अपनी मिमिक्री से दर्शकों को हंसी से लोटपोट कर दिया। उनकी शानदार प्रस्तुति ने हर उम्र के लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। महोत्सव के सफल आयोजन के लिए सभी प्रतिभागियों और समिति के पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया। पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ता को मण्डल उपाध्यक्ष पप्पू भदानी के नेतृत्व में सम्मानित किया गया। समाज के डोनर परिवार से प्रदीप भदानी को भी समिति ने विशेष रूप से सम्मानित किया। 

सम्मान ग्रहण करते हुए प्रदीप भदानी ने कहा कि जल्द हीं मां मथुरासिनी मंदिर का निर्माण होगा साथ हीं उन्होंने बताया कि मां मथुरासिनी महोत्सव हमारी कुलदेवी हैं और सिरही पूजा से जुड़ा हुआ है। अब यह समाज की गौरवशाली परंपरा, जातीय एकता और समृद्धि का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने बताया कि आज माहुरी समाज के लोग इसे भारत के विभिन्न महानगरों में भी बड़े स्तर पर मना रहे हैं, जिनमें कोलकाता, दुर्गापुर, रानीगंज, रायरंगपुर, अहमदाबाद, पुणे, उल्हासनगर (मुंबई), सूरत, बेंगलुरु और दिल्ली एनसीआर शामिल हैं। 

महामंडल उपाध्यक्ष रवि कपसीमे ने जानकारी देते हुए बताया कि मां मथुरासिनी महोत्सव की शुरुआत श्री फकीरचंद्र राम जी द्वारा बोकारो में की गयी थी। इसके बाद यह परंपरा आगे बढ़ती गयी। झुमरी तिलैया में वर्ष 2001 में  सदानंद प्रसाद भदानी, कालीचरण राम तरवे, रामचंद्र सेठ, दर्शन राम कपसीमे, दमोधर प्रसाद भदानी और बनमाली राम भदानी ने इसे आगे बढ़ाया। शुरुआत में यह एक दिवसीय महोत्सव था। फिर कुछ वर्षों बाद यह दो दिवसीय हुआ और साल 2005 से इसे तीन दिवसीय महोत्सव के रूप में मनाया जाने लगा।

महोत्सव में मंडल अध्यक्ष अरुण सेठ, सचिव सुनील भदानी और महोत्सव संयोजक अभिषेक रंजन, उपाध्यक्ष पप्पू भदानी ने भी सभा को संबोधित किया और समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के परीयोजना निर्देशक राजेश भदानी और अंजना भदानी को सफल संचालन के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का मंच संचालन नेहा बड़गवे ने किया, जिसमें गौतम वैशकीयार ने सहयोगी की भूमिका निभायी।

मां मथुरासिनी महोत्सव अब केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह समाज की एकता और समृद्धि का प्रतीक बन चुका है। यह महोत्सव नयी पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने और समाज को मजबूत करने का कार्य कर रहा है। हर वर्ष यह आयोजन समाज के लिए प्रेरणा और गर्व का विषय बनता जा रहा है। 

मौके पर महोत्सव संयोजक अभिषेक रंजन, मंडल अध्यक्ष अरुण सेठ, सचिव सुनील भदानी, प्रतीक कुमार, केंद्रीय महिला समिति उपाध्यक्ष सुनीता सेठ, उदय बड़गवे, सुनील ब्रहपुरिया, प्रभाकर भदानी, नवीन आर्य, संदीप लोहानी, नरेश गुप्ता, अजय लोहानी, गौतम वैशकियार, रवि लोहानी, शुभम कप्सिमे, दिलीप ब्रहपुरिया, नितेश कुमार, दिलीप लोहानी, बंटू पहाड़ी, उचित अठघरा, विकास वैशकियार, महेंद्र लोहानी, मुकेश ब्रहपुरिया, सोनू लोहानी, वेद प्रकाश भदानी, विजय कप्सिमे, प्रदीप कंडवे, अंकित एकघरा, रोबिन्स एकघरा, रुपेश लोहानी, रेनू बड़गवे, पूर्णिमा सेठ, शिवांगी कुमारी सहित सैकड़ों की संख्या में समाज के लोगों शामिल हुए।

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