लापरवाही से हादसे पर मुआवजे का हक

 

  • उपभोक्ता कानून के तहत पीड़ित कर सकते हैं दावा
  • उपभोक्ता कानून के तहत न्याय पाने का हक

श्रीगोपाल नारसन

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। किसी भी सेवा प्रदाता विभाग या कंपनी की लापरवाही की वजह से जान-माल का नुकसान हो और वह उस मामले में दोषी पाया जाये तो उपभोक्ता का अधिकार उससे मुआवजा लेने का है। यदि विभाग आनाकानी करे तो नुकसान की भरपाई के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत दावा कर सकता है।

घटना 14 दिसंबर, 2015 की है। एक किशोर छत पर बैठकर पढ़ाई कर रहा था। बाहर से किसी के आवाज देने पर वह छत से नीचे की ओर झांककर देखने लगा। इस दौरान बिजली का तार ढीला होने के कारण हवा के झोंके से छज्जे पर लगी लोहे की ग्रिल से छू गया। जिससे ग्रिल पर करंट उतर आया और किशोर के दोनों हाथ बिजली के करंट से झुलस गये।

उसने बड़े अस्पतालों में इलाज कराया ,परन्तु डॉक्टरों द्वारा उसके दोनों हाथ काटने पड़े। करंट से अपने दोनों हाथ गंवाने वाले किशोर ने अपने अधिकारों की नौ साल कानूनी लड़ाई लड़ी। सिविल जज त्वरित न्यायालय ने उक्त हादसे के लिए बिजली विभाग को दोषी मानते हुए 20 लाख रुपये जुमार्ना पीड़ित को दो माह के भीतर अदा करने के आदेश दिए, साथ ही इस राशि पर मुकदमा दायर करने के समय से ही छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी।

लापरवाही की शिकायत पर कार्रवाई न होने का मामला

बता दें कि पीड़ित ने नौ साल पहले न्यायालय में उक्त मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें पावर कारपोरेशन के चेयरमैन और अधिशासी अभियंता को प्रतिवादी बनाया था। वादी का कहना था कि उनके मकान के छज्जे से मात्र आठ से 10 इंच की दूरी पर 33 केवी लाइन गुजर रही थी। लाइन के बीच में न तो गार्डिंग की व्यवस्था थी और न ही बीच में पोल लगाकर तारों को कसा गया था। 

खतरे को भांपकर उनके पिता व अन्य मोहल्लेवासियों ने उक्त दुर्घटना से कुछ माह पहले लाइन हटवाने के लिए अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिए परन्तु कोई कार्यवाही नहीं हुईङ्घ और यह हादसा हो गया। इस तरह के हादसे या फिर हाई वोल्टेज के कारण उपभोक्ता का कीमती सामान फुंक जाने पर की गई शिकायत के बाद यदि बिजली विभाग न तो कोई कार्रवाई करे और न ही मुआवजा दे तो उपभोक्ता विभाग पर हुए नुकसान के मुआवजे का दावा ठोक सकता है।

हाई वोल्टेज से घरेलू उपकरण जल जायें तो

एक अन्य मामला ज्यादा वोल्टेज से घरेलू उपकरण जलने का है। गाजियाबाद में हाई वोल्टेज से कई घरों के लाखों रुपये के विद्युत उपकरण जैसे मोबाइल चार्जर, टीवी, कूलर, फ्रिज और पंखा आदि फूंक गये। ऐसी स्थिति में हुए नुकसान की भरपाई के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 में उपभोक्ताओं को ऐसे अधिकार प्राप्त हैं कि अगर वह उनका इस्तेमाल करें तो उसे नुकसान की भरपाई ब्याज सहित प्राप्त हो सकती है। 

यानी अधिक वोल्टेज की वजह से आपका टीवी, फ्रिज या एसी फुंक गया है तो ऊर्जा निगम मुआवजा देगा। 43 इंच से अधिक के कलर टीवी, पूरी तरह आॅटोमैटिक वॉशिंग मशीन, कम्प्यूटर, एसी और 200 लीटर से अधिक का फ्रिज फूंकने पर प्रत्येक सामान के लिए 5000 रुपये तक मुआवजा मिलेगा। विद्युत नियामक आयोग ने हाल ही में मुआवजा बढ़ाया है। 

पहले यह मुआवजा अधिकतम पांच सौ रुपये था। इसी श्रेणी के छोटे या कम क्षमता के उपकरणों के फूंकने पर भी कम से कम एक हजार रुपये का मुआवजा तय किया गया है। इस तरह बिजली उपकरण फूंकने पर एक हजार से पांच हजार रुपये तक मुआवजा मिलेगा। हालांकि इसके लिए तय प्रक्रिया पूरी करनी होगी तथा बिल दिखाने होंगे।

बिजली बहाली न होने से जुड़े प्रावधान

नये नियमों के अनुसार फ्यूज उड़ने पर राज्य के शहरी क्षेत्रों में चार घंटे, ग्रामीण क्षेत्रों में आठ घंटे और ऐसे पर्वतीय क्षेत्र जो सड़क से नहीं जुड़े हैं, वहां 12 घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति सुचारु करनी होगी। ऐसा न होने पर एक उपभोक्ता के मामले में 20 रुपये प्रति घंटा और पूरे क्षेत्र के मामले में 10 रुपये प्रति उपभोक्ता प्रति घंटा मुआवजा दिया जाएगा। इसके इलावा उपभोक्ता को बिजली कनेक्शन आवेदन के 15 दिन में अनिवार्य रूप से देना होगा। समय पर कनेक्शन न मिला तो विभाग उपभोक्ता को प्रतिदिन पांच रुपये के हिसाब से मुआवजा देगा।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 उपभोक्ताओं को उन कंपनियों से भी लड़ने की ताकत देता है, जो पहले के उपभोक्ता कानून में नहीं थी। उपभोक्ताओं को न्याय के लिए उपभोक्ता अदालतों के साथ-साथ केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण भी गठित किया गया है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना का उद्देश्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना है।

साथ ही अनुचित व्यापारिक गतिविधियां, भ्रामक विज्ञापनों और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों को भी प्राधिकरण देखता है और उसका निपटारा करता है। इसी तरह उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का काम है। (लेखक उत्तराखंड राज्य उपभोक्ता आयोग के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं।)

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