प्रेस विज्ञप्ति
आनन्दमार्ग प्रचारक संघ द्वारा मेदिनीनगर पलामू के आनंदमार्ग जागृति परिसर में आयोजित तीन दिवसीय सेमिनार का रविवार को समापन हो गया। सेमिनार के अंतिम दिन मुख्य प्रशिक्षक आचार्य नभातीतानंद अवधूत ने श्रेय और प्रेय विषय पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। आचार्य ने अपने संबोधन में कहा, श्रेय और प्रेय, मानव जीवन के दो मुख्य पहलू हैं, जो हमारे विचार, कार्य और जीवन की दिशा को तय करते हैं।
श्रेय और प्रेय का अंतर के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि श्रेय आत्मिक उत्थान और अनंत सुख का मार्ग है, जो जीवन के वास्तविक उद्देश्य की पहचान कराता है।
प्रेय तात्कालिक सुख और भौतिक लाभ का मार्ग है, जो अस्थिरता और असंतोष को बढ़ावा देता है। श्रेय के महत्व: के बारे में बताया कि श्रेय को अपनाने से व्यक्ति न केवल आत्मिक शुद्धि प्राप्त करता है, बल्कि समाज और मानवता के कल्याण में भी योगदान देता है। यह मार्ग आत्म-नियंत्रण, तपस्या और त्याग की प्रेरणा देता है, जिससे शांति और संतोष मिलता है।
आचार्य जी ने बताया कि नैतिक नियमों (यम और नियम), ध्यान, प्राणायाम और समाधि का पालन श्रेय के मार्ग की नींव है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जीवन को सार्थक बनाने के लिए श्रेय का मार्ग चुनना आवश्यक है। आध्यात्मिक साधनाओं के माध्यम से जीवन को उच्चतर उद्देश्य की ओर ले जाने का संदेश देकर आज के कक्षा का समापन किया गया। इस मौके पर सैकड़ों मार्गियों व आम जनता ने भाग लिया।
इस मौके पर रीजनल सचिव आचार्य रतमुक्तानंद अवधूत, सेवा धर्म मिशन सचिव आचार्य जगात्मानंद अवधूत, डायसिस महिला सचिव अवधूतिका विष्णुमाया आचार्य, भूक्ति प्रधान मधेश्वर, देवनाथ जी, लक्ष्मण सिंह, बैजनाथ जी, सरोज, देवेंद्र, संदीप, संजय, चंदन समेत कई लोग उपस्थित हुए।
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