स्वामी विवेकानंद अद्भुत और अनुपम व्यक्तित्व के संत थे : हरिस बिन जमां

 

  • लोहरदगा के पुलिस कप्तान ने स्वामी विवेकानंद के 162वीं जयंती पर कार्यक्रम का किया शुभारंभ
  • बच्चों ने भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों ने प्रस्तुत किया
  • यतिराज डिवाइन स्पार्क पब्लिक स्कूल में स्वामी विवेकानंद की जयंती पर पूर्ववर्ती छात्र सम्मान समारोह का हुआ आयोजन

सुदीप्ता मुखर्जी

टीम एबीएन, लोहरदगा। स्वामी विवेकानंद अद्भुत, अनुपम, व्यक्तित्व वाले थे। उनके जीवन को कोई भी व्यक्ति एक प्रतिशत भी अपने में निहित करेगा। वह नैतिक मूल्यों और अनुशासन से बंधा रहेगा। उक्त बातें लोहरदगा के पुलिस कप्तान हरिस बिन जमां ने कहीं। लोहरदगा सेन्हा प्रखंड के सेरेंगहातू में भंडरा रोड स्थित यतिराज डिवाइन स्पार्क पब्लिक स्कूल प्रांगण में स्वामी विवेकानंद की 162 वीं जयंती और पूर्ववर्ती विद्यार्थी सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। 

एसपी ने कहा कि अच्छी नीतियों और अच्छी शिक्षा देकर विद्यालय प्रबंधन ने यहां के भावी भविष्य को लगभग तीन दशक से गढ़ने का काम कर रहे हैं। यह स्वामी विवेकानंद के उसे महामंत्र को यथार्थ प्रदान करता है, जो उन्होंने कहा था- उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए। यानी यह युवाओं के लिए प्रेरणा देता है, कि संघर्ष करने वाले को प्रोत्साहित करता है, ताकि वह अपने सपने को सच कर सके। 

विद्यालय के संचालक वीके बालांजिनप्पा कर्नाटक के हैं और उनकी पत्नी मणिपुर की है। दोनों ने लोहरदगा जैसे छोटे जगह को अपना कर्म स्थली बनाने का काम किया है। यहां के भाभी भविष्य को बनाने का संकल्प लिया है। यह इसके लिए बधाई के पात्र हैं। स्वामी विवेकानंद जी ने 1893 में शिकागो में जो संदेश दिया, उससे वह शांति और मानवता के पथ प्रदर्शक बन गये। 

एसपी ने कहा कि विद्या से सुचरितता, सुशीलता और सेवा आदि गुणों की प्राप्ति होती है। छात्र जीवन का निर्माण गुणों से हासिल करना होता है। उन्होंने कहा कि हम लोग स्कूल में विवेकानंद को पढ़ा उनके माध्यम से ही हमारा जीवन नियमित संयमित और अनुशासित बना है। यतिराज डिवाइन स्पार्क पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर वीके बालान्जिनप्पा ने इस मौके पर कहा कि देश और नागरिक का रिश्ता विश्वास और आस्था का होता है। 

उसी प्रकार शिक्षक और विद्यार्थी का रिश्ता आदर और सम्मान का होता है। हमें गर्व है, कि हमारे पूर्ववर्ती छात्र वर्तमान समय में राष्ट्र सेवा के कई गरिमा में पदों पर प्रतिष्ठा बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकल्प बहुत है बिखरने के लिए, संकल्प एक ही काफी है सवारने के लिए। यह सीख भी हमें स्वामी विवेकानंद से मिलता है। वह नित्य नवाचार पर विश्वास करते थे। 

इसी वजह से उन्हें सुभाष चंद्र बोस ने भी आधुनिक भारत के निर्माता के रूप में स्वामी विवेकानंद को कहा था। यही नहीं नोबेल पुरस्कार विजेता और रवींद्रनाथ ठाकुर ने भी कहा था, कि भारत को जानना है तो विवेकानंद का अध्ययन करो। ऐसे महान राष्ट्र पुरुष की जयंती मना कर हम गौरवनित हो रहे हैं। जिस तरह फूल में सुगंध का महत्व है। इस तरह व्यक्ति में व्यक्तित्व का महत्व है। इस मौके पर पूर्ववर्ती छात्रों को सम्मानित किया गया। 

इस खास मौके पर स्कूली बच्चों ने आकर्षक और राष्ट्र के विभिन्न संस्कृतियों पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन विवेक जाय अनाल और सामी बालान्जिनप्पा ने किया।

कार्यक्रम में अन्य लोगों के अलावा डॉ गणेश प्रसाद, डॉ टी साहू, प्रो पीएन अग्रवाल, संजय बर्मन, पिंटू सिंह, विनोद पाठक, आलोक कुमार, हैप्पी, जाह्नवी, रामविलास सिंह समेत बड़ी संख्या में गण्यमन नागरिक ग्रामीण और अभिभावक मौजूद थे।

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