एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि सफला एकादशी हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला पर्व है। यह एक विशेष उपवासी व्रत है जो भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति और परम सुख की प्राप्ति के लिए प्रोत्साहित करता है।
इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, जिन्हें संसार के पालनहार के रूप में पूजा जाता है। इस वर्ष पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 25 दिसंबर को रात 10 बजकर 29 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन 27 दिसंबर को रात 12 बजकर 43 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार 26 दिसंबर दिन गुरुवार को सफला एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
सफला एकादशी का महत्व विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए है जो जीवन में विभिन्न परेशानियों और दुखों से जूझ रहे होते हैं। यह व्रत मानसिक शांति, समृद्धि और भक्ति की ओर मार्गदर्शन करता है। इस दिन उपवासी रहकर भक्ति में लीन रहने से व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
यह एकादशी भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का अवसर है, जिनकी उपासना से जीवन में सुख-शांति का वास होता है। व्रत के दौरान श्रद्धालु केवल एक बार भोजन करते हैं और रात को जागरण करते हुए भजन-कीर्तन करते हैं। कुछ लोग इस दिन विशेष रूप से विष्णु सहस्रनाम् का पाठ भी करते हैं। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन नियमपूर्वक उपवास रखता है और भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
सफला एकादशी का महत्व भारतीय संस्कृति में बहुत गहरा है। यह न केवल एक धार्मिक अवसर है, बल्कि आत्मसंयम और भक्ति की दिशा में एक अहम कदम भी है। इस दिन को सही रूप से मनाने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सकते हैं, और यह उसे एक सशक्त और संतुष्ट जीवन की ओर मार्गदर्शन करता है।
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