टीम एबीएन, लोहरदगा। जिले में 30 दिसंबर 2023 को सरना कोड लागू करने को ले भारत बंद आदिवासी सेंगेल अभियान केन्द्रीय सरना समिति, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, जिला सरना समिति लोहरदगा, राजी पड़हा प्रार्थना सभा लोहरदगा जिला एवं विभिन्न सरना आदिवासी संगठन के अगुवागण की बैठक केतकी होटल में हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला सरना समिति के अध्यक्ष चैतू उरांव ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद सालखन मुर्मू एवं विशिष्ट अतिथि के तौर पर केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष फूलचंद तिर्की उपस्थित थे।
सालखन मुर्मू ने कहा कि सरना कोड भारत के प्राकृतिक पूजक लगभग 15 करोड़ आदिवासियों के अस्तित्व पहचान हिस्सेदारी के जीवन रेखा है। 2011 की जनगणना में 50 लाख आदिवासियों ने सरना धर्म लिखवाया था सरना धर्म कोड के बगैर आदिवासियों को जबरन हिंदू, मुसलमान, ईसाई आदि बनाना धार्मिक गुलामी को मजबूर करना है।
15 नवंबर को प्रधानमंत्री उलिहातु दौरा और राष्ट्रपति का 20 नवम्बर को मयूरभंज के बारीपदा आए थे परंतु सरना कोड के बारे में कुछ नहीं बोला जिसके चलते आदिवासी समाज आंदोलन के लिए बाध्य है एवं 30 दिसंबर 2023 को आदिवासी भारत बंद और रेल, रोड चक्का जाम करेंगे।
केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने कहा कि सरना कोड मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा सरना कोड को लेकर पूरे देश में वृहद आंदोलन चलाया जा रहा है 30 दिसंबर को भारत बंद ऐतिहासिक होगा।
मौके पर केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष फूलचंद तिर्की, लोहरदगा जिला सरना समिति के अध्यक्ष चैतू उरांव, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष सत्यनारायण लकड़ा, बना मुंडा, प्रमोद एक्का, दीपक कुमार आदि मौजूद थे।
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