टीम एबीएन, रांची। भौतिकवादी जिंदगी में हंसना इंसान भूल गया है इस हंसी को संजोने का काम झारखंड कला सांस्कृतिक शोध संस्थान रंगमंडल एवं नाट्य अकादमी के द्वारा आज विश्व हास्य दिवस के उपलक्ष में रांची हिनू स्थित विद्या भारती में आयोजित किया गया।
संस्था के सचिव डॉ दीपक प्रसाद ने बताया की विश्व हास्य दिवस जिसकी शुरुआत 1998 में मई महीने के प्रथम रविवार को किया गया था। इसकी शुरुआत मुंबई से की गई। हास्य योग की एक पद्धति है जिससे मनुष्य के अंतर आत्मा की शुद्धि होती है। व्यक्ति ऊर्जावान और सशक्त बनता है।
आज पूरा विश्व शांति की खोज में लगा हुआ है, मानवता को बचाने की होड़ चल रही है। हमारा मुख्य उद्देश्य यह है कि इस विश्व हास्य दिवस के उपलक्ष में मनुष्यों में इसकी लोकप्रियता बड़े और विश्व को शांति का संदेश दे।
इस समय पूरे विश्व में शीत युद्ध चल रहा है। आज हमारा देश भारत पूरे विश्व को मानवता की पाठ पढ़ा रहा है जीने का ढंग सिखा रहा है। अपनी संस्कृति से जोड़ने की अपील कर रहा है। आज पूरा विश्व आतंकवाद से ग्रसित है।
दुनिया में अशांति फैली हुई है, हर मनुष्य के दिमाग में अशांति छाई हुई है। इससे निजात पाने के लिए यह विश्व हास्य दिवस एक रामबाण साबित होगा। हास्य हमें एक दूसरों से जुड़ना सिखाता है। यहां न कोई जाति धर्म संप्रदाय का भेदभाव रहता है ना कोई बैर।
इस मौके पर उपस्थित विभागाध्यक्ष जनसंपर्क विभाग केंद्रीय विद्यालय इन झारखंड ने कहा कि हंसना हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक है हंसने के लिए कोई पैसे खर्च नहीं करना पड़ता।
इससे हमारा मन मस्तिष्क और शरीर के अन्य क्रियाएं सुचारू रूप से कार्य करती है। वहीं मौके पर चार्टर्ड अकाउंटेंट सुमित मित्तल संस्था के सह सचिव अविनाश कुमार एवं कई प्रसिद्ध व्यक्ति उपस्थित रहे।
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