टीम एबीएन, रांची। झारखंड के बोकारो में बर्ड फ्लू फैलने के बाद अब चार हजार मुर्गियों और बत्तखों को मारने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। एक अधिकारी ने बताया कि लोहांचल के फार्म में कड़कनाथ मुर्गे में एच5एन1 वायरस की पुष्टि हुई। बर्ड फ्लू के कारण 800 पक्षी मर गये। वहीं, 103 मुर्गों को मारना पड़ा।
लोहांचल के फार्म के एक किलोमीटर के दायरे में प्रभावित क्षेत्र में शनिवार देर शाम मुर्गों और बत्तखों सहित कुल 3,856 पक्षियों को मारने की प्रक्रिया शुरू हुई। इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन, रांची के निदेशक डॉ बिपिन ने बताया कि पक्षियों को मारने का काम रविवार को भी जारी रहेगा क्योंकि इस प्रक्रिया में समय लगता है।
डॉ बिपिन ने बताया कि 2 फरवरी को खेत में मुर्गियों के मरने के बाद उनके सैंपल राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भोपाल भेजे गये। रिपोर्ट में मुर्गियों के बर्ड फ्लू से संक्रमित होने की पुष्टि हुई।
उन्होंने आगे बताया कि अब प्रभावित क्षेत्र में मुर्गियों और बत्तख को मारने की प्रक्रिया शुरू की गयी है। जिन लोगों के मुर्गियां और बत्तखें काटी जा रही हैं, उनके लिए मुआवजा तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जिला प्रशासन ने पहले ही जहां संक्रमण की पुष्टि हुई, वहां से 1 किमी के दायरे को प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया है। जबकि 10 किमी के दायरे के क्षेत्रों को निगरानी क्षेत्र घोषित किया गया है। इसने जिले में चिकन और बत्तख की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया।
प्रभावित जोन में रहने वाले लोगों के भी लिए जायेंगे सैंपल : अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अरुण कुमार सिंह ने पहले कहा था कि राज्य अलर्ट पर है। जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी और बड़े फार्मों पर मुर्गियों और बत्तखों के सैंपल लेने के लिए एक मेडिकल टीम का गठन किया गया। साथ ही प्रभावित जोन में रहने वाले लोगों के सैंपल लेने को भी कहा है। दूसरी ओर, इंसानों में बर्ड फ्लू फैलने के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। बर्ड फ्लू से संक्रमित लोगों के लिए सदर अस्पताल में अलग से वार्ड बनाया गया है।
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