मेदांता रांची की एक और उपलब्धि, क्रिटिकल केस में मरीज का किया सफल उपचार, स्वस्थ जीवन जी रही मरीज

 

  • मेदांता रांची ने एक 70 वर्षीय महिला का सफल इलाज किया है। इस महिला को डीसीएम यानी डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी बीमारी थी 

टीम एबीएन, रांची। अपनी एक्सपर्ट डॉक्टर्स की टीम, अत्याधुनिक तकनीक और मरीज के प्रति जिम्मेदारी के साथ मेदांता रांची सफल उपचार में लगातार उपलब्धि हासिल कर रहा है। मेदांता रांची ने एक 70 वर्षीय महिला का सफल इलाज किया है। इस महिला को डीसीएम यानी डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी बीमारी थी। उपचार के बाद महिला अभी एकदम स्वस्थ्य जीवन जी रही है। 

मेदांता रांची के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजी डॉ मुकेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि मेदांता रांची में एक 70 वर्षीय महिला का केस आया था। इनको शार्टनेस आफ ब्रेथ था। जिसकी ग्रेडिंग इनवाईएचए क्लास 4 थी। ये महिला रात में सो भी नहीं पाती थी। रात भर बैठ कर रहती थी। 

इनकी सांस इतनी फूल रही थी। मेदांता रांची में जब इनका इलाज शुरू हुआ तो बहुत सारे मेडिसिन दिए गए। लेकिन इन महिला मरीज की प्रॉब्लम ठीक नहीं हो पा रही थी। मरीज का इजेकशन फ्रेक्शन 27 प्रतिशत था, जबकि उनकी डायग्नोसिस डीसीएम था साथ ही इसीजी में एलबीबीबी था।  

डॉ मुकेश ने बताया कि इसके बाद मरीज को एक डिवाइस लगाने की प्लानिंग की गई। इस डिवाइस को सीआरटीडी कहा जाता है। उस डिवाइस को मेदांता रांची में गत गुरुवार को लगाया गया। डिवाइस को लगाने के बाद मरीज की इलाज में काफी सुधार है। पहले जितना शार्टनेस आफ ब्रेथ था, वह काफी कम हो गया है। इस डिवाइस को लगाने से धीरे-धीरे इसका इंप्रूवमेंट और बढ़ेगा। आने वाले 15 से 20 दिन में वो मरीज आक्सीजन के बिना वह अपना काम कर लेंगी। 

मेदांता रांची के कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ मुकेश ने बताया कि इस डिवाइस को लगाने के लिए सबसे पहले हृदय में 3 तार डालने होते हैं। 3 चेंबर में 3 तार इस डिवाइस को चलाते हैं। और साथ में इन वायर के साथ एक बैटरी कनेक्टेड होता है। जिसे पल्स जनरेटर कहा जाता हैं। पल्स जनरेटर में  बैटरी होता है। इसको स्किन के नीचे लेफ्ट साइड के सोल्जर के नीचे स्किन में फिट कर दिया जाता है। 

चेस्ट के अपर पार्ट में बैटरी को फिट कर दिया जाता है और फिर डिवाइस को तीन तार से कनेक्ट कर दिया जाता है। ये तार हर्ट का जो कॉन्ट्रैक्टलिटी उसे सिंक्रोनाइज करके रेगुलेटेड वे में कॉन्ट्रैक्ट करवा देते हैं। यानी मरीज का जो इजेक्शन फ्रेक्शन 27 प्रतिशत था, इसको इंप्रूव कर के 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक जा सकते हैं। यह 60 प्रतिशत भी हो सकता है। 

मेदांता रांची के कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ मुकेश ने बताया कि इस डिवाइस की बैटरी एक तरह से कैपेसिटर है। इसमें चार्ज स्टोर होता है। इसके 3 तार में से एक तार शॉकवेव देता है। अगर पेशेंट को कभी और अरिदिमिया होता है। वीटी/वीएफ होता है तो उसके अंदर एक तार शॉकवेव देगा और आटोमेटिक डिफाइब्रिलेशन देकर अरिदिमिय को खत्म कर देगा। जिसके कारण पेशेंट की जान बच जायेगी। इस मशीन को लगाने का मुख्य कारण यही है कि बहुत सारे मरीज जिनके हृदय का फंक्शन कम होता है और अरिदिमिया होने का चांस ज्यादा होता है। इसको लगाने से अगर कोई अरिदिमिया हो तो वह आॅटोमेटिक शॉक देकर उसको कन्वर्ट कर देता है और मरीज की जान बच जाती है। 

डॉ मुकेश ने बताया कि इस मरीज के सांस फूलने का मुख्य कारण रिड्यूस्ड हार्ट फंक्शन था। हृदय का जो पंपिंग फंक्शन है, वह रिड्यूस हो चुका था। वैसे जो नॉरमल पर्सन होते हैं उनके हृदय का फंक्शन 60 प्रतिशत से ऊपर होता है। इस मरीज के हर्ट का पंपिंग फंक्शन 27 प्रतिशत तक हो चुका था। डॉक्टर मुकेश ने बताया कि मेदांता रांची में कार्डियक क्रिटिकल केयर के लिए सारी अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है। 

वहीं मेदांता रांची के हॉस्पिटल डायरेक्टर विश्वजीत कुमार ने बताया कि मेदांता रांची में इलाज की सारी विश्वस्तरीय सुविधा उपलब्ध है। यहां डॉक्टरों की एक्सपर्ट टीम है, जो किसी भी हालात में इलाज करने में सक्षम हैं। इसी कारण से मेदांता रांची चिकित्सा के क्षेत्र में नया आयाम हासिल कर रहा है।

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