भाजपा से मुक्ति चाह रही झारखंड की जनता : सुप्रियो भट्टाचार्य

 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भाजपा के शीर्ष नेताओं के झारखंड दौरे को लेकर सवाल उठाया है। पार्टी के केन्द्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि 2019 के विधानसभा चुनाव में राज्य की जनता ने भाजपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया। तभी से भाजपा नेताओं में एक व्याकुलता थी। व्याकुलता यह कि कैसे दोबारा झारखंड में प्रवेश करें। 

चुनाव में भाजपा कोल्हान में तो समाप्त हो गयी। संथाल से भी करारा जवाब मिला। अब ऐसा लग रहा है कि पूरा झारखंड ही भाजपा से मुक्त होना चाहती है। यही कारण है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार झारखंड दौरा कर रहे हैं। सुप्रियो भट्टाचार्य रविवार को पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि अमित शाह हेमंत सोरेन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे थे। आज झामुमो भाजपा और अमित शाह से पूछा रहा है कि अडाणी की आज ऐसी स्थिति क्यों है? आज जब एसबीआई और एलआईसी की स्थिति पर असर पड़ रहा है, तो भाजपा नेता आखिर चुप क्यों हैं? पिछले एक साल से हम ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स का नाम सुन रहे हैं, तो आज यह जांच एजेंसी क्यों खामोश है। झामुमो नेता ने कहा कि आज ईडी अधिकारियों को गुजरात और मुंबई जाना चाहिए।

सुप्रियो ने कहा कि अमेरिका की वित्तीय शोध करने वाली एक कंपनी हिंडनबर्ग ने अपने 103 पन्नों की रिपोर्ट में अडाणी समूह की कार्यशैली पर सवाल उठाया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि अडाणी समूह दशकों से शेयरों के हेरफेर और अकाउंट की धोखाधड़ी में शामिल है। इससे अडाणी की कंपनियों में निवेश करने वाली भारतीय बैंकों और एलआईसी को भी झटका लगा है। निवेशकों को भी चिंता सता रही है। इस मामले को लेकर संसद में भी खूब हंगामा हुआ। 

भाजपा नेताओं को तो स्वतः आगे बढ़कर पूरे मामले की जांच की मांग करनी चाहिए। झामुमो नेता ने मांग की है कि इस वित्तीय घोटाला पर सर्वोच्च न्यायालय को संज्ञान ले और इसे लेकर एक निष्पक्ष जांच शुरू करे।

अमित शाह के देवघर दौरे को लेकर भी सुप्रियो भट्टाचार्य ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि देश के गृहमंत्री अमित शाह नैनो फर्टिलाइजर के लिक्विड प्लांट का शिलान्यास करने देवघर आए थे, जिस जमीन पर यह प्लांट लगेगा, वहां पहले साबुन बनाया जाता था, जो टाटा कंपनी का था। बाद में जब कंपनी का विलय दूसरी मल्टीनेशनल कंपनी में हुआ, तो जमीन जियाडा के पास आयी। उसी जमीन पर 2016 में खेल शुरू हुआ। जमीन व्यक्ति विशेष को हस्तांतरित हुआ। फिर टारगेट हुआ कि कैसे उसे सहकारिता विभाग में लाया जाये, ताकि उपयोग तो केंद्र सरकार करे, लेकिन हित किसी व्यक्ति विशेष का हो।

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