एबीएन बिजनेस डेस्क। जब भारत में सरकार ने जीएसटी लागू करने का निर्णय लिया, तब कई राजनीतिक दलों ने कई कारणों से इसका विरोध किया। भारत सरकार के सामने एक बहुत बड़ा कार्य इन सबको जीएसटी के लिए राजी करवाना था, क्योंकि जीएसटी के लिए न सिर्फ संविधान संशोधन करवाना था बल्कि जीएसटी कानून को भी संसद से पास करवाना था। और उसके बाद सबसे बड़ा कार्य, उसे भारत के कम से कम आधे राज्यों की विधान सभाएं से भी पास करवाना था। इन सबके लिए आवश्यक था कि भारत सरकार विपक्षी दलों को भी साथ ले क्योंकि कई राज्यों में उनकी सरकारें थी।
जीएसटी के पूर्व भारत में जो भी केंद्रीय कर प्रणाली होती थी उसमें उसके नियमों और दरों में परिवर्तन केंद्र सरकार समय समय पर किया करती थी। जैसा कि हम आज भी पाते हैं कि आय कर के नियमों और दरों में परिवर्तन केंद्रीय सरकार हर वर्ष अपने बजट के माध्यम से करती है और उसमें राज्य सरकारों कि कोई हस्तक्षेप नहीं होता। पर भारत सरकार, विपक्षी दलों वाली राज्य सरकारों के समर्थन लेने हेतु जीएसटी को एक विकेंद्रीकरण कर प्रणाली के रूप में लाना चाहती थी जिसके नियमों और दरों में परिवर्तन सिर्फ केंद्र सरकार के बजाए केंद्र और राज्य, दोनों सरकारों के सहयोग से, होता रहे। इसी कारण जीएसटी काउंसिल का गठन किया गया जो कि जीएसटी के दरों और नियमों में परिवर्तन करने की सबसे बड़ी नीतिगत संस्था है और भारत सरकार इसके निर्णयों को ही अधिनियम के माध्यम से देश में लागू करती है।
जीएसटी काउंसिल भारत के प्रजातांत्रिक और केंद्र व राज्य सरकारों के नीतिगत मामलों में सहभागिता का ऐतिहासिक उदाहरण है। जीएसटी काउंसिल के सदस्य भारत के सभी राज्यों के वित मंत्री हैं और भारत सरकार के वित मंत्री इसकी बैठकों की अध्यक्षता करते हैं। जीएसटी के किसी भी नियम या जीएसटी की दरों में परिवर्तन जीएसटी काउंसिल करती है और भारत सरकार का कार्य महज उन निर्णयों को लागू करना होता है। जीएसटी काउंसिल का हर निर्णय दो तिहाई बहुमत से लिया जाता है।
केंद्र सरकार का इसमें वोटिंग अधिकार एक तिहाई ही है, जिसका मतलब है कि एक तिहाई राज्यों के समर्थन के बिना केंद्रीय वित मंत्री भी कोई निर्णय लागू नहीं करवा सकते हैं। वे सिर्फ प्रस्ताव ला सकते हैं जिसे राज्य सरकारों के सहयोग के बाद ही दो तिहाई बहुमत से पारित किया जा सकता है।
सारांश में इतना कहा जा सकता है कि जब भी हमें जीएसटी के किसी नियम में परिवर्तन या इसके नियमों में परिवर्तन करवाने की आशा हो तो हमें व्यवसायिक संगठनों के मध्यम से जीएसटी काउंसिल में अनुरोध भेजना चाहिए, क्योंकि यह ही जीएसटी कर प्रणाली की हमारे देश में सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था है। (लेखक सीएमए, कॉस्ट एवम मैनेजमेंट अकाउंटेट और कर सलाहकार हैं।)
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