टीम एबीएन, जमशेदपुर/ रांची। रसायनिक खाद के उत्पादन, विपणन और बिक्री के क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी कोआपरेटिव कॉरपोरेट कंपनी इफको झारखंड के देवघर जिले में 400 करोड़ की लागत से नैनो यूरिया प्लांट लगा रही। कंपनी ने इसके लिए जमीन का अधिग्रहण कर लिया है और चारदीवारी निर्माण के पश्चात अगले 3 साल के भीतर इस प्लांट को तैयार करके नैनो यूरिया का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया जाएगा।
इफको के संयुक्त प्रबंध निदेशक राकेश कपूर ने abnnews24.com के साथ एक विशेष बातचीत में उक्त जानकारी दी है। राकेश कपूर आज जमशेदपुर के दो दिवसीय प्रवास पर यहां पहुंचे और अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच खबर मंत्र से विस्तृत बातचीत की। उन्होंने बताया कि 1967 में स्थापित इफको का गठन 57 सहकारी समितियों को मिलाकर किया गया है जो खेतों के लिए रसायनिक खाद उत्पादन करने वाली आज दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है। इफको का सालाना टर्नओवर 42000 करोड़ रुपये हैं।
उन्होंने बताया कि कंपनी झारखंड में अपना पहला रसायनिक खाद कारखाना देवघर जिले में स्थापित करने जा रही है जिसमें 2025-26 तक नैनो एरिया का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा। इस प्लांट की क्षमता सालाना 6 करोड़ बोतल नैनो यूरिया का उत्पादन करने की होगी। इस प्लांट के बनने से देवघर जिले के स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और किसानों को नैनो यूरिया मिल सकेगा।
संयुक्त प्रबंध निदेशक राकेश कपूर ने कहा कि झारखंड खनिज एवं वन संपदा से परिपूर्ण राज्य हैं और इस राज्य के किसानों की प्रति एकड़ उपज बढ़ाने की दिशा में मदद करने के लिए इफको आने वाले दिनों में और प्रभावी तरीके से काम करेगी। कंपनी के संयुक्त प्रबंध निदेशक राकेश कपूर का कहना है कि नैनो यूरिया भारतीय खेती किसानी के लिए गेम चेंजर प्रोडक्ट है जो लागत में कम और फसलों को हरियाली बनाए रखने में डबल क्षमता प्रदान करता है और पौष्टिकता भी बहुत ज्यादा प्रदान करता है।
क्या है नैनो यूरिया?
नैनो यूरिया इफको का शोध एवं विकास डिवीजन का अत्याधुनिक तरल यूरिया है । आधे लीटर की बोतल में नैनो एरिया पैक रहता है जो 45 कि ग्रा वाली एक बोरी यूरिया के बराबर उर्वरक क्षमता रखता है। नैनो यूरिया इफको का पेटेंट कराया हुआ उत्पाद है और इफको दुनिया की पहली कंपनी है जिसने नैनो यूरिया का विकास उत्पादन एवं विपणन शुरू किया है। यह विशिष्ट उत्पाद 2022 से किसानों के बीच उपलब्ध कराया जा रहा है।
नैनो यूरिया के फायदे
नैनो यूरिया 45 किलोग्राम के पुरे में बंद यूरिया के बराबर क्षमता रखता है किंतु इसका बोतल मात्र आधा किलो वजन का होता है। यानी किसानों को इसे खेत तक पहुंचाना आसान है। नैनो यूरिया के चलते खेतों की उपज 10% तक बढ़ जाती है और यह बोरा बंद यूरिया की तुलना में 25 रुपया सस्ता है।नैनो यूरिया फसलों पर स्प्रे किया जाता है इसलिए इससे जल स्तर के प्रदूषित होने का खतरा नहीं होता और फसल तक 80% तक नाइट्रोजन सफलतापूर्वक पहुंचने की गुंजाइश रहती है। भारत सरकार विदेशों से हर साल बड़ी मात्रा में बोरा बंद यूरिया आयात करती है जो किसानों को 260 रुपये प्रति बोरा की दर से उपलब्ध कराया जाता है जबकि भारत सरकार प्रति बोरा रुपया 2700 से अधिक की सब्सिडी वह सहन करती है। नैनो यूरिया पूरी तरह स्वदेशी है और इस पर किसी तरह का सब्सिडी बोझ भारत सरकार को नहीं पड़ता है इसलिए इसे भारत सरकार उत्साहित कर रही है।
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