पारुल यूनिवर्सिटी गुजरात ने कराया प्रिंसिपल-टीचर्स मीट

 

  • युवाओं को सही दिशा देना आज सबसे जरूरी : डॉ पवन द्विवेदी 

टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची के सिरमटोली स्थित एक होटल के सभागार में पारुल यूनिवर्सिटी बड़ोदरा गुजरात ने प्रिंसिपल टीचर्स मीट का आयोजन किया। शनिवार को आयोजित इस कार्यक्रम  में राज्य भर से आये शिक्षक, प्राचार्य और शिक्षाविदों को पारुल यूनिवर्सिटी के डिप्टी रजिस्टार (एकेडमिक) डॉ पवन द्विवेदी ने संबोधित किया।  

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि देश और समाज की स्थिति लगातार बेहतरी की ओर जा रही है। हमारा देश में जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान के साथ ही जय अनुसंधान के नारे की सार्थकता समझाते हुए कहा कि हमें कृतज्ञ होना चाहिए लेकिन हम कृतध्न होते जा रहे हैं। कोरोना काल की समस्या को लेकर उन्होंने सबसे बुदिजीवी वर्ग शिक्षक प्राचार्य और शिक्षाविदों से जानना चाहा कि हमने सबसे अधिक जोखिम वाले नर्स दीदीयों, डॉक्टर, पुलिसवाले और कोरोना का दुनिया में सबसे बेहतरीन टीका रिकार्ड समय में बनाने वाले वैज्ञानिकों को किस प्रकार याद किया। 

श्री द्विवेदी ने कहा हम अपने बहस के मुद्दों को कुछ विषयों पर सीमित करते है जो बहुत छोटे होते हैं। हमें राष्टÑीय स्तर पर विमर्श करना चाहिए। हम शिक्षक और अभिभावक के तौर पर जो कर रहें है वहीं समाज में पा रहे हैं। हमारी पीढ़ी पूरे तौर पर नशा की शिकार हो रही है हमारे संयुक्त परिवार टूट रहें है, हमारे गुरुकुल का नाश हो रहा है यह चिंता का विषय है। दूसरी ओर हमारे किसान कोरोना काल हो या विपरीत स्थिति वे आजादी के समय की 30 करोड़ की आबादी की भूखमरी को 140 करोड़ के संपूर्ण आहार तक की यात्रा करके जय किसान का नारा बुलंद कर रहे हैं। यही नहीं अंतरिक्ष और रक्षा सेवा में भारत विश्व का सबसे सस्ता उपग्रह प्रक्षेपण का रिकार्ड बनाकर पूरी दुनिया को टक्कर दे रहा है।  

डॉ द्विवेदी ने कहा कि  जो देश अन्न के दाने के लिये तरसा है वह आज आधी दुनिया को अन्न की आपूर्ति कर रहा है। जय विज्ञान के साथ ही अब भारत जय अनुसंधान की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। ड्रोन तकनीक से भारत की दशा-दिशा बदलने वाली है। साथ ही कृषि के क्षेत्र को खेती और किसानी में तब्दील कर हम विश्व में श्रेष्ठ स्थान पा सकते हैं। युवाओं को प्रेरित करने की हमारी पीढ़ी की जबावदेही को रेखाकिंत करते हुए डॉ द्धिवेदी ने कहा कि हमारी आदतों से ही परेशान हो रही है हम अगर विदेशी वस्तु और विचार को अपना आदर्श मानेंगे तो हमारे आदर्श कलाम, नंदन नीलकेनी, वीजी कुरियन, होमी जहांगीर भाभा कैसे हो सकते हैं। हमें अपने आदर्श और संस्कृति पर गर्व करना होगा और युवाओं को भी प्रेरित करना होगा। 

इस अवसर पर मोटिवेटर-काउंसलर एनके मुरलीधर ने कहा कि आज शिक्षा और समाज का रिश्ता बिगड़ा है। हर अभिभावक को उनके बच्चे तो अपने लगते हैं लेकिन स्कूल अपना नहीं लगता। समाज सदैव सरकार से बड़ा होता है। श्री मुरलीधर ने नालंदा विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां असम के राजा घी भेजा करते थे और नालंदा में प्रकाश व्यवस्था दीपनगर गांव के लोग किया करते थे। वे अपने शिक्षण संस्थाओं पर गर्व करते थे। आज 18 लाख युवा देश से बाहर जा रहे हैं। विदेशी यूनिवर्सिटी कोदेश में सेंटर खोलने की इजाजत दे दी गयी है।  

इस अवसर पर पारुल यूनिवर्सिटी के झारखंड प्रभारी नितीन नवीन ने वित्त चित्र के माध्यम से जानकारी दी कि पारुल यूनिवर्सिटी में 25 हजार छात्र अध्ययन कर रहे हैं। कार्यक्रम में रांची, भुरकुंडा, रामगढ़, खूंटी सहित कई स्थानों से प्रिंसिपल और शिक्षक कार्यक्रम में शिरकत किया।

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