पदाधिकारियों का दर्द : प्रोन्नति तो मिली, लेकिन पदस्थापन नहीं...

 

  • टूट रहा राज्य प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियों का मनोबल

टीम एबीएन, रांची। राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को लंबे इंतजार के बाद सरकार ने प्रोन्नति तो दे दी, लेकिन वे अब भी पूर्व के पदों पर ही काम कर रहे हैं। प्रोन्नति के बाद जिस पद पर उन्हें पदस्थापित किया जाना था, उस पद पर पदस्थापन ही नहीं किया गया है। नतीजतन प्रोन्नत होने के बावजूद निराशा और कुढ़न का शिकार हो रहे हैं। उनका मनोबल टूट रहा है। कामकाज में भी मन नहीं लग रहा। नतीजतन सरकारी कामकाज प्रभावित हो ही रहा है, आम जनता का काम भी नहीं हो पा रहा है। कई मामलों में तो ऐसा भी हो रहा है कि प्रोन्नति के बावजूद पूर्व के पदों पर तैनात रहते हुए सीनियर अफसरों को निर्देश दे पाने की स्थिति में नहीं हैं।

एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सीनियर अफसरों को कैसे निर्देश दें? जिला स्तर पर लॉ एन ऑर्डर बहाल रखने में परेशानी हो रही है। कहा कि आईएएस अधिकारियों काे समयबद्ध प्रमोशन और इनक्रीमेंट मिलता है, लेकिन राज्य प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियों को सरकार न तो समय पर प्रमोशन देती है और न पदस्थापन ही करती है। एक ओर पदाधिकारियों का पदस्थापन नहीं हो रहा है, तो दूसरी ओर कई जिला में एक ही अफसर कई-कई विभागों की जिम्मेवारी संभाल रहे हैं। 

ऐसी स्थिति राज्य के लगभग सभी जिलों में है। प्रोन्नति और पदस्थापन के मामले में मुख्य सचिव सुखदेव सिंह ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव व सचिव को 15 दिसंबर 2022 भेजा था, इसमें स्पष्ट आदेश था कि प्रोन्नति की अधिसूचना बगैर पदस्थापन आदेश के निर्गत न की जाये। लेकिन प्रोन्नति और पदस्थापन के मामले में उनके निर्देशों की भी किसी को चिंता नहीं। या यूं कहें कि उनके निर्देश को भी जानबूझ कर नजरअंदाज किया जा रहा है।

प्रशासनिक पद क्रम

बेसिक ग्रेड से जूनियर सेलेक्शन ग्रेड में प्रोन्नति सेकंड और थर्ड जेपीएससी से चयनित अफसरों को दी गयी है। जिसकी अधिसूचना जून 2022 में जारी हुई, लेकिन सरकार ने दिसंबर 2020 से ही इन्हें प्रमोचट किया है। इनमें 130 पदाधिकारी हैं। वहीं चौथे जेपीएससी से चयनित करीब 60 पदाधिकारियों को भी प्रमोशन दिसंबर 2022 में दिया गया। लेकिन अभी भी उनसे बेसिक ग्रेड पर ही सरकार काम लिया जा रहा है। आलम यह है कि सैंकड़ों अफसर प्रोन्नति के बावजूद पदस्थापन के इंतजार में बैठे हैं। ऐसी स्थिति तब है, जब कई अफसर एकसाथ कई पदों की जिम्मेवारी संभाल रहे हैं। डीटीओ का पद जूनियर सेलेक्शन ग्रेड में आता है। राज्य में करीब 190 राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसर पदस्थापन के इंतजार में हैं, जबकि एक डीटीओ दो-दो, तीन जिलों का प्रभार संभाल रहे हैं। उदाहरण के तौर पर पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला जिला का प्रभार एक ही डीटीओ संभाल रहे हैं।

जूनियर सेलेक्शन ग्रेड से उप सचिव पद पर प्रोन्नत करीब 55 अफसरों को सितंबर 2021 में प्रोन्नति मिली। लेकिन सभी पूर्व के पद पर ही बने हुए हैं। इतना ही नहीं इनमें करीब 40 अफसरों को संयुक्त सचिव स्तर के पद पर नवंंबर 2022 में प्रोन्नति मिल चुकी है, लेकिन सभी अभी भी डीसीएलआर, एसडीओ, डीएसओ, डीएलओ के पद पर अपनी सेवा दे रहे हैं। संयुक्त सचिव स्तर के कई पदाधिकारी भूमि सुधार उप समाहर्ता या अपर समाहर्ता पद पर अपनी सेवा दे रहे हैं। 

प्रशासनिक पदों का सही अनुपालन नहीं होने से प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गयी है, क्योंकि जूनियर अफसरों द्वारा सीनियर अफसरों पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो रहा है। रामगढ़ के एडिशनल कलेक्टर नेलशन बागे को सरकार ने आईएएस में प्रोन्नत किया है, लेकिन वह अभी भी एसी (एडिशनल कलेक्टर) के पद पर काम कर रहे हैं।

जिला भू-अर्जन पदाधिकारी चाईबासा के पद पर कार्यरत एजाज अनवर को संयुक्त सचिव के पद पर प्रमोशन मिला है। लेकिन वर्तमान में भी जूनियर सेलेक्शन ग्रेड पर ही काम कर रहे हैं। लॉ एन ऑर्डर से जुड़े कनीय पद पर मौजूद पदाधिकारी किसी तरह के कार्य के लिए उन्हें निर्देश नहीं दे पाते।

शब्बीर अहमद डीएसओ पलामू का प्रमोशन संयुक्त सचिव स्तर के पद पर हुआ है। लेकिन हाल में हुए डीएसओ ट्रांसफर में उन्हें डीएसओ चाईबासा के पद पर पदस्थापित किया गया है। सूचना के अनुसार उन्होंने डीएसओ चाईबासा के पद पर योगदान नहीं दिया है।

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