टीम एबीएन, गिरिडीह/ रांची। गिरिडीह जिले में स्थित पारसनाथ पहाड़ को लेकर विभिन्न आदिवासी संगठनों में विवाद रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। इसके चलते आदिवासी संगठनों ने पारसनाथ पहाड़ पर अधिकार को लेकर आने वाली 24 फरवरी को झारखंड बंद करने का ऐलान कर दिया है।
आदिवासी मुख्यमंत्री होते हुए आदिवासियों को हक के लिए मांगनी पड़ रही भीख
आदिवासी संगठनों द्वारा मुखरता से मांग रखी गई है कि अगर पारसनाथ पहाड़ को मरांग बुरु के रूप में सरकारी नोटिफिकेशन में दर्ज नहीं किया, तब तक आदिवासियों का राज्य में आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, बीते मंगलवार को देश के 4 राज्यों से हजारों की संख्या में जुटे आदिवासी संगठन के महाजुटान को संबोधित करते हुए सत्तारूढ़ दल झारखंड मुक्ति मोर्चा के बोरियों से विधायक लोबिन हेंब्रम ने अपनी ही सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह शर्म की बात है कि आदिवासियों की सरकार रहते हुए, राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री होते हुए भी आज आदिवासियों को अपने अधिकार के लिए भीख मांगनी पड़ रही है।
पार्टी से टिकट काटा जा सकता है पर माटी से नहीं
लोबिन हेंब्रम ने आरोप लगाया है कि सरकार के खिलाफ और आदिवासी के हक को लेकर आवाज उठाने पर उन्हें धमकी दी जाती है कि उनका चुनाव में टिकट काट दिया जाएगा, उन्होंने कहा कि पार्टी से टिकट काटा जा सकता है पर माटी से नहीं। पारसनाथ में जुटे संथाल आदिवासी का यह मानना है कि पारसनाथ पर स्थित जुग जाहेर थान व मांझी थान आदिकालीन पूर्वज पिलचु आयो पिलचु बाबा द्वारा स्थापित तीर्थ स्थल है।
आदिवासियों का पवित्र स्थल ह्यमरांग बुरुह्ण पर नहीं है तो और कहां है
लोबिन हेंब्रम ने यह मांग की है कि राज्य सरकार ही बताएं कि आदिवासियों का पवित्र स्थल ह्यमरांग बुरुह्ण पारसनाथ पर्वत पर नहीं है तो और कहां है? लोबिन हेंब्रम ने कहा कि वे भी जैन धर्मावलंबियों के आस्था का सम्मान करते हैं पर जिस प्रकार से पारसनाथ पर्वत पर जैन धर्मावलंबियों द्वारा कब्जा कर वहां के मूल उपासक आदिवासियों को उनकी पूजा पद्धति और पशु बलि जैसी अनुष्ठान को करने से रोका जा रहा है यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पारसनाथ में तो ट्रेलर है पिक्चर राजधानी रांची के मोराबादी मैदान में दिखाइए।
पहले जैन समुदाय के लोगों ने किया था विरोध
गौरतलब है कि पारसनाथ क्षेत्र को पर्यटन स्थल घोषित किए जाने पर जैन समुदाय ने विरोध किया था, जिसे लेकर जैन धर्मावलंबियों ने राज्य समेत पूरे देश में आंदोलन किया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने जैन धर्म की मांगों को मानते हुए पूर्व की तरह पारसनाथ को जैन धर्म का तीर्थ स्थल ही रहने दिया। साथ ही केंद्र सरकार ने पारसनाथ पहाड़ी के क्षेत्र में मांस-मदिरा के सेवन पर पाबंदी लगा दी है, जिसके चलते अब आदिवासी संगठन इस बात का विरोध कर रहे हैं।
आदिवासी धर्म के रीति-रिवाज में पशु बलि की प्रथा रही है
आदिवासी संगठनों के लोगों का कहना है कि आदिवासी धर्म के रीति-रिवाज में पशु बलि की प्रथा रही है। पारसनाथ पहाड़ हमारा धार्मिक पर्वत मरांग बुरु है, हमें वहां पशु बलि देने का अधिकार मिले।
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