जीएसटी के तहत रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म क्या है?

 

अजय दीप वाधवा 

एबीएन बिजनेस डेस्क। जीएसटी में रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (आरसीएम) के अंतर्गत कई लेन देन में आपूर्तिकर्ता के बजाय प्राप्तकर्ता द्वारा जीएसटी भुगतान की प्रक्रिया है। इस मामले में, कर भुगतान का दायित्व आपूर्तिकर्ता के बजाय प्राप्तकर्ता/ क्रेता को स्थानांतरित कर दिया जाता है। इसे ही रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (आरसीएम) बोलते हैं। सामान्यता जीएसटी में क्रेता बिल के साथ जीएसटी भी विक्रेता या आपूर्तिकर्ता को भुगतान कर देता है जिसे विक्रेता या आपूर्तिकर्ता निश्चित तिथि के अंदर सरकार को दे देता है। पर कुछ परिस्थितियों या लेनदेन में क्रेता या प्राप्तकर्ता सिर्फ वस्तुओं या सेवाओं के मूल्य का बिल का भुगतान ही विक्रेता या आपूर्तिकर्ता को करता है, जीएसटी का नहीं और जीएसटी वह सीधे सरकार को जमा कर देता है। अर्थात आरसीएम में जीएसटी भुगतान की जिम्मेवारी विक्रेता की न हो कर क्रेता, खरीददार या प्राप्तकर्ता की होती है। 

उदाहरण के लिए, श्याम ने हरि को 1,00,000 रुपये का सामान विक्रय किया। जीएसटी के समान्य प्रणाली के हिसाब से श्याम द्वारा हरि से जीएसटी लिया जायेगा और आगे सरकार को भुगतान किया जायेगा। लेकिन इस व्यवहार या लेनदेन में अगर आरसीएम प्रणाली लागु होती है तो हरि द्वारा श्याम को जीएसटी का भुगतान करने के बजाय सीधा सरकार को भुगतान किया जायेगा। अर्थात, जीएसटी भुगतान सरकार को करने की जिम्मेवारी श्याम की न हो कर आरसीएम के तहत हरी की हो जायेगी। आरसीएम (रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म) सामान्यता आयात, अपंजीकृत (जिसका रजिस्ट्रेशन ना हो) डीलर से खरीदारी और कुछ अधिसूचित वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लागू होता है। सरकार अधिसूचना के तहत उन वस्तुओं या सेवाओं को अधिसूचित करती है जिस पर आरसीएम के तहत जीएसटी का भुगतान होगा। 

वर्तमान परिदृश्य में, बीमा एजेंट, जनशक्ति आपूर्ति, माल परिवहन एजेंसी, आदि जैसी सेवाओं के लिए भी सेवा कर में रिवर्स चार्ज तंत्र लागू है। प्राप्तकर्ता को आपूर्ति पर 100% जीएसटी कर का भुगतान करना होता है। पहले के परिदृश्य में, माल परिवहन के समान ही कई असंगठित क्षेत्रों से सेवा कर एकत्र करना सरकार के लिए कठिन होता था व सरकार को पूर्ण कर की प्राप्ति नहीं होती थी। पर जीएसटी में सरकार ने कर वंचना से बचने के लिए आरसीएम के अंर्तगत उन विक्रेता या आपूर्तिकर्ता से भी जीएसटी प्राप्त कर लेती है जिस से पूर्व के विक्रय कर, वैट या सेवा कर के युग में कर प्राप्त नहीं हो पाता था। (लेखक सुप्रसिद्ध सीएमए, कॉस्ट एंड मैनेजमेंट एकाउंटेंट, कर/ वित्तीय/ निवेश सलाहकार हैं।)

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

Tranding

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse